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अलवर मेयर चुनाव: निर्दलीय रिंकल गर्ग ने वापस लिया नाम, अब भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला

अलवर नगर निगम मेयर चुनाव की सियासी तस्वीर शुक्रवार को नाम वापसी के बाद पूरी तरह साफ हो गई है। निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल गर्ग की ओर से नामांकन वापस लेने के बाद अब चुनावी मैदान में सिर्फ भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। 21 सितंबर को होने वाले मतदान में दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।
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alwar nagar nigam mayor election

रिंकल गर्ग ने वापस लिया नाम (फोटो - पत्रिका)

अलवर नगर निगम मेयर चुनाव में नाम वापसी के बाद अब मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच रह गया है। भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा मैदान में हैं। निर्दलीय रिंकल गर्ग के नामांकन वापस लेने के बाद अब दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा। 21 सितंबर को मतदान के जरिए मेयर का चुनाव होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पार्षदों को एकजुट रखने और समर्थन जुटाने में जुटे हैं।

बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी

अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं और मेयर चुनाव में बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। चुनाव परिणाम में भाजपा 28 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी है, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आई हैं। इसके अलावा 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद हैं। ऐसे में दोनों दलों के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और बाकी पार्षदों का समर्थन चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो गया है।

भाजपा की सुमनलता अग्रवाल वार्ड 7 से पार्षद चुनी गई हैं। वह पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं। कांग्रेस ने वार्ड 39 से पार्षद कमलेश शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। कमलेश शर्मा पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी हैं। दोनों प्रत्याशियों के नामांकन 16 सितंबर को दाखिल हुए थे। उसी दिन निर्दलीय रिंकल गर्ग ने भी नामांकन दाखिल किया था।

मेयर पद के लिए दो प्रत्याशी मैदान में

रिंकल गर्ग वार्ड 36 से पार्षद का चुनाव हार गई थीं, लेकिन इसके बाद उन्होंने मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया था। नामांकन के बाद से ही उनके मैदान में रहने को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही थीं। अब नाम वापसी के साथ यह स्थिति खत्म हो गई है और मेयर पद के लिए दो प्रत्याशी ही रह गए हैं।

निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर

नाम वापसी के बाद दोनों दलों का पूरा ध्यान पार्षदों के समर्थन पर है। अलवर में भाजपा के पास 28 पार्षद हैं, इसलिए उसे बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पांच और समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास 23 पार्षद हैं और उसे 10 और पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में निर्दलीय और बसपा पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

दोनों खेमों में बैठकों और रणनीति का दौर तेज हो गया है। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने पार्षदों को साथ रखने के साथ दूसरे पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं। अब सभी की नजर 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर है, जब पार्षदों के वोट से अलवर नगर निगम का अगला मेयर चुना जाएगा।