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अलवर मेयर चुनाव: भाजपा और कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का डर, निर्दलीयों पर नजर

अलवर नगर निगम मेयर चुनाव की तारीख 21 सितंबर जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 65 वार्डों वाले निगम में जादुई आंकड़ा 33 का है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के सामने निर्दलीयों को जोड़ने के साथ ही अपने पार्षदों में संभावित क्रॉस वोटिंग रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 18 Sep 2026, 11:26 AM IST

alwar mayor election

representative picture (patrika)

अलवर नगर निगम मेयर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के सामने निर्दलीयों के वोट लेने के साथ ही क्रॉस वोटिंग को रोकना बड़ी चुनौती बन गया है। 21 सितंबर को होने वाले चुनाव में दोनों ही दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। संख्या बल के लिहाज से भाजपा के पास 28, कांग्रेस के पास 23, निर्दलीय 13 और बसपा का एक पार्षद है। ऐसे में निर्दलीयों को अपने पाले में लाकर मेयर बनाने का दावा करना आसान नजर आ रहा है, लेकिन मतदान के दिन बदलते समीकरण पूरे माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।

वर्ष 2019 के नगर परिषद सभापति चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। उस समय भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत से दूर रह गई थी। चुनाव में सात वोट क्रॉस हुए थे। कांग्रेस के पास महज 19 पार्षद थे, इसके बावजूद भाजपा के कुछ पार्षद टूटकर कांग्रेस खेमे में पहुंच गए थे।

इस घटनाक्रम ने दोनों दलों को मतदान के दौरान अपने पार्षदों की निगरानी और रणनीति पर विशेष ध्यान देने के लिए मजबूर किया था। इस बार भी दोनों ही दलों में कुछ पार्षदों के टूटने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि पार्टियां केवल निर्दलीयों को साधने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने पार्षदों को भी एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। मालूम हो कि मेयर के लिए 65 वाटों में से 33 वोट चाहिए।

इस बार भी अपनाए जा सकते हैं ये तरीके

2019 के चुनाव में क्रॉस वोटिंग का पता लगाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने वोटरों को पेन में हिडन कैमरे के अलावा कैमरे वाले चश्मे भी दिए थे। हालांकि, पुलिस ने इन्हें जब्त कर लिया था। इस बार भी मतदान के दौरान ऐसे तरीके राजनीतिक दल अपना सकते हैं। क्योंकि क्रॉसिंग वोटिंग की आशंका अभी बनी हुई है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था और मतदान की गोपनीयता बनाए रखना प्रशासन के लिए भी चुनौती होगी।

भाजपा के पार्षदों का फोकस केवल अपने प्रत्याशी पर है। हमारी पार्टी में क्रॉस वोट का चलन नहीं है। हम पूर्ण बहुमत से चुनाव जीत रहे हैं। मेयर हमारा बनेगा - अशोक गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष

हमारे पार्षद कांग्रेस प्रत्याशी को ही वोट देंगे। हमने सभी की सहमति से प्रत्याशी का चयन किया है। 21 को महापौर के परिणाम सभी को चौंकाएंगे - प्रकाश गंगावत, जिलाध्यक्ष कांग्रेस