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एक फाटक की वजह से परेशान हो रहे हैं अलवर के लाखों लोग, अब केवल बची है एक ही आस

अलवर के कालीमोरी फाटक बंद होने के बाद अब जनता काफी परेशान हो रही है, इसको लेकर धरना भी दिया जा चुका है।

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अलवर

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Prem Pathak

Feb 17, 2018

public is worried after closing of kalimori fakat in alwar

अलवर. शहर में काली मोरी रेलवे फाटक को बंद करने के बाद करीब डेढ़ लाख की आबादी की मुश्किलें कम होने की बजाए बढ़ती जा रही हैं। अब सरकार ने अण्डर पास बनाने की बात जरूर कही हैं। लेकिन रेलवे का कहना है कि यहां अण्डर पास के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। यदि सरकार के स्तर से जमीन उपलब्ध कराई जाती है तो केवल दुपहिया वाहन निकलने का अण्डरपास बनाया जा सकता है। जिसमें से चौपहिया वाहन भी नहीं निकल सकेंगे। काली मोरी फाटक बन्द होने के बाद बच्चे, विकलांग, महिला व बुजुर्गों की राह खतरे से कम नहीं है। कभी भी कोई दुर्घटना का शिकार हो सकता है।

इस तरह का माहौल बना फाटक बंद होने से

काली मोरी रेलवे फाटक बंद होने से डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए हैं। नए फ्लाईओवर पर आए दिन हादसे होते हैं। महिलाएं व बच्चे डर के साए में जीवन यापन कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि काश ये रेलवे फाटक बंद नहीं होता। इस बीच सरकार कह रही है की काली मोरी क्षेत्र में अंडर पास बनाया जाएगा। जबकि रेलवे ने अंडर पास बनाना असम्भव बताया है। रेलवे की रिपोर्ट के हिसाब से अगर प्रदेश सरकार अंडर पास के लिए जगह देती है तो, केवल दो पहिया वाहनों के लिए अंडर पास का निर्माण हो सकेगा। रेलवे के पास अंडर पास के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।

अंडरपास निर्माण में लगेंगे छह माह

अंडरपास के निर्माण में करीब छह माह का समय लगेगा। जमीन अधिग्रहण, डिजाइन बनाने, टेंडर निकालने सहित अन्य कार्य में पांच से छह माह का समय लग सकता है। इस हिसाब से काली मोरी अंडर पास के निर्माण में एक साल तक समय लगना तय है।

धरना देकर भी सरकार को चेताया

लोकसभा उप चुनाव से पहले काली मोरी क्षेत्र की कॉलोनी के लोगों ने यूआईटी के बाहर धरना दिया। पार्षद ने भूख हड़ताल की। उसके बाद रेलवे मुख्यालय से रेलवे के अधिकारियों से सर्वे के लिए कहा गया। नियम के हिसाब से दो पहिया अंडर पास के लिए रेलवे लाइन के दोनों तरफ 60-60 मीटर जगह की आवश्यकता है। लेकिन रेलवे के पास केवल 30-30 मीटर जगह उपलब्ध है। इस कारण अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी। जिसके लिए सरकार से जमीन की जरूरत पड़ी। तभी अंडर पास बन सकता है। जबकि चार पहिया वाहनों के लिए अंडर पास बनना असम्भव है। रेलवे की अनुमति से ही अण्डर पास बन सकेगा।

काली मोरी से आगे ही संभव

काली मोरी रेलवे फाटक तक रेलवे का यार्ड है। अलवर बांदीकुई रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। एेसे में काली मोरी फाटक पर एक लाइन डलने का काम चल रहा है। जबकि एक अन्य रेलवे लाइन डाली जाएगी। क्योंकि मुख्य रेलवे लाइन के अलावा एक पासिंग लाइन यार्ड में होती है। जिसके कारण फाटक से आगे ही अण्डर पास की संभावना है।

अंडर पास बनाने की सूचना मिली थी, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार की तरफ से लिखित में कोई सूचना नहीं मिली है। उसके लिए इंजीनियरिंग विभाग से प्रदेश सरकार को पत्र लिखा है। वैसे उस जगह पर अंडर पास के लिए जगह नहीं है। एेसे में देखना होगा की कैसे अंडर पास बनेगा।
सौम्या माथुर, डीआरएम, जयपुर रेलवे मण्डल