11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

अलवर की जनता में इस वजह को लेकर है भारी रोष, प्रशासन पर लगा रहे गंभीर आरोप

अलवर की जनता का कहना है कि पार्षद व प्रशासन जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Prem Pathak

Feb 27, 2018

Public of alwar angry on it's bad condition

अलवर. शहर की सरकार की थोथी राजनीति में अब जनता का दम घुटने लगा है। बदरंग हो चुके शहर में जनप्रतिनिधियों पर जनता ही सवाल खड़े करने लगी है। नगर परिषद अलवर के जिम्मे शहर को अतिक्रमण मुक्त व साफ रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अफसोस जनता को ये दोनों ही सबसे अधिक खटक रही हैं। गंदगी का आलम ये है कि कोई जगह अछूती नहीं है। जहां शुद्ध हवा मिल सके। बीमारियां पनप रही हैं। जनता की जेब दवाओं में ढीली हो रही हैं। अतिक्रमण के आगे तो पैदल निकलना मुश्किल हो गया है। नगर परिषद की बोर्ड की बैठकों में जनता के मुद़्दों पर चर्चा ही नहीं होती है। शोर-शराबे के बीच जरूरी प्रस्ताव पास हो जाते हैं। तभी तो गंदगी अपनी जगह है अतिक्रमण अपनी जगह। दिनोंदिन आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन जनप्रतिनिधि खामोश। केवल तमाशबीन बनकर रहे गए हैं।

जनता में है रोष

शहर के पार्षदों को भी शर्म आती होगी, गली-मोहल्ले व कॉलोनियों के हालत देखकर। फिर भी बोर्ड की बैठकों में बेतुकी चर्चा व हंगामा करने के अलावा कुछ नहीं होता। जनता का नुकसान ही नहीं बल्कि सबको परेशानियां हो रही हैं।
विनोद शर्मा, स्कीम एक निवासी

जितने भी जनप्रतिनिधि हैं उनको सोचने की जरूरत है। जनता ने जिस कार्य के लिए इनको चुना है कोई नहीं हो रहा है। अतिक्रमण की कार्रवाई भी दोहरी होती है। बड़े लोग छोड़ दिए जाते हैं। गरीब का सामान समेट लाते हैं। गंदगी का आलम हेै।
विनोद यादव, व्यवसायी

नगर परिषद की जिम्मेदारी शहर की सफाई करना है। लेकिन बदहाली है। सफाई नहीं होने से कई तरह की बीमारियां पनप रही है। जिससे जनता को दिक्कतें होती है। इस पर जनप्रतिनिधियों को एकमत होकर कार्य करने की जरूरत है।

डॉ. अजीत सिंह , चिकित्सक

शहर के मौजूदा हालत वाकई खराब हैं। इस पर शहर की सरकार को सोचने मात्र से ही काम नहीं चलेगा बल्कि धरातल पर कार्य करके दिखाना होगा। तभी शहर की तस्वीर बदलेगी और जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता का नजरिया। -सुरेश गुप्ता, संयोजक, संयुक्त व्यापार महासंघ

पार्षदों व शहर का हाल सोचनीय है। थोथी राजनीति करने में लगे हैं। जिसका परिणाम भी जनता ने दिखा दिया है। कई संस्थाओं को लड़ाई लडऩी पड़ रही है। पार्षदों को अपना कार्य समझना चाहिए। नहीं तो उनको भी परिणाम भुगतने होंगे।
तोष कुमार जैन, छात्र नेता

नगर परिषद कोई काम नहीं कर रही है। यहां होने वाली बैठकें केवल खानापूर्ति के लिए होती है। पक्ष विपक्ष यदि मिलकर काम करें तो शहर की सफाई व्यवस्था सहित अन्य समस्याओं का समाधान हो सकता है।
अलका गुप्ता, फ्रेंड्स कॉलोनी, अलवर