
अलवर. यूआईटी और नगर परिषद की अनदेखी का ही नतीजा है कि शहर की अधिकतर आवासीय योजनाओं के खाली भूखण्डों में सैकड़ों टन कचरा सालों से जमा हो रहा है। जिसकी गंदगी व बदबू से पड़ौसयों का रहना मुश्किल हो गया है। पूरे शहर में खाली भूखण्डों में बिना किसी रोकटोक के कचरा डाला जा रहा है। असल में यूआईटी भी उतनी ही जिम्मेदार है जितना नगर परिषद। यूआईटी की दशकों पुरानी आवासीय योजनाओं में भी खाली भूखण्ड पड़े हैं। एक नहीं सैकड़ों भूखण्ड निवेशकों के हैं। जबकि भूखण्ड देते समय तय समयावधि में उस पर निर्माण करना जरूरी होता है। लेकिन एेसा नहीं हो रहा है। या तो सरकार से छूट मिल जाती है या यूआईटी के स्तर पर भी अनदेखी होती रहती है। जिसका फायदा उस भूखण्ड के आसपास के लोग उठाने का प्रयास करते हैं। हालांकि लगातार डाली जा रही गंदगी से कॉलोनी के अधिकतर लोग परेशान हैं। फिर भी प्रशासन चुप रहकर इस तरह कचरा डालने के कार्य को मूक अनुमति देता रहता है।
कचरा ही नहीं उठाया जाता
नगर परिषद की जिम्मेदारी यह है कि न तो खाली भूखण्डों में फेंका जा रहा कचरा उठाया जाता है न वहां आसपास कचरा पात्र रखवाए जा रहे हैं। जिसके कारण खाली भूखण्डों में मनमर्जी से कचरा फेंकने का क्रम जारी है। बहुत से भूखण्ड तो कचरे से अट गए हैं।
इन सब कॉलोनियों में
यूआईटी की स्कीम एक, स्कीम दो, विजय नगर, बुध विहार, हसन खां, स्कीम आठ, स्कीम पांच, स्कीम सात, अम्बेडकर नगर सहित अनेक कॉलोनियों में भूखण्ड खाली पड़े हैं। कुछ कॉलोनयों में भी खाली भूखण्ड अधिक हैं। वहां कचरा पात्र ही नजर नहीं आते हैं। अधिकतर कचरा ही प्लॉटों में फेंका जा रहा है।
रेंगे कार्रवाई
वैसे तो खाली भूखण्ड मालिकों से पेनल्टी लेने का प्रावधान है। भूखण्ड से सम्बंधित कोई भी प्रक्रिया होने पर जुर्माना लि या जाता है। खाली भूखण्ड पर तय समय में निर्माण करना भी जरूरी है। फिर भी इस मामले में हम कार्रवाई करेंगे। ताकि कचरा नहीं डाला जाए।
कान्हाराम, सचिव, यूआईटी अलवर
Published on:
13 Jan 2018 03:04 pm
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