
राजस्थान के किसानों को बंदर के पंजे की वजह से 20 करोड़ से अधिक का नुकसान, स्पेशल टीम ने की जांच
अलवर. राजस्थान के किसानों को बंद के पंजे की वजह से करोड़ों का नुकसान हो रहा है। बहरोड़ क्षेत्र के करीब 20 गांवों की 4 हजार हैक्टेयर जमीन में खड़ी करीब 20 करोड़ रुपए की कपास की फसल को बंदर का पंजा चट करने में लगा है। लगातार दूसरे साल यहां की अच्छी-खासी कपास की खेती फैक्ट्रियों से निकल रहे प्रदूषण की भेंट चढऩे लगी है। करीब तीन फीट ऊंची कपास की खेती में ‘बंदर का पंजा’ रोग लग चुका है। किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग के चार वैज्ञानिकों की टीम ने जांच करके रिपोर्ट में यह माना है कि बदलते पर्यावरण और फैक्ट्रियों से निकलने वाली दूषित हवा इस रोग का कारण है।
गादोज गांव निवासी विजयपाल ने बताया कि अब किसानों के हित में कोर्ट में जनहित याचिका लगाने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी करोड़ों की कपास बर्बाद हो गई थी। सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा की लेकिन, अभी तक कुछ नहीं मिला।
3 क्विंटल की जगह 50 किलो कपास
किसानों ने बताया कि कपास में यह रोग लगने के कारण पिछले साल तीन से चार क्विंटल की जगह केवल 50 से 60 किलो ही कपास की पैदावार हुई। जिससे किसानों को मोटा नुकसान हो गया। सरकार का मुआवजा अब तक नहीं मिला है।
पिछले साल से कम बुआई
साल 2018 में बहरोड़ के इन गांवों में कपास की खेती 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो गई थी। जिसके कारण इस बार 4900 हैक्टेयर की बजाय 3 हजार 500 हैक्टेयर में ही कपास की बुआई की गई है। किसानों का कहना है कि कपास का बीज महंगा आता है। कपास की खेती में थोड़ी बचत ठीक होती है। जिसके कारण कपास की खेती अधिक होने लगी हैं लेकिन, इन गांवों में फैक्ट्रियों की दूषित हवा खेती को बर्बाद कर रही है। जानकार लोगों ने बताया कि कुछ फैक्ट्रियों में खरपतवार बनाने की दवा बनती है। फैक्ट्रियों की प्रदूषित हवा खड़ी खेती के पत्तों को बंदर के पंजों की तरह मुरझा देती है।
पिछले साल से कम बुआई
साल 2018 में बहरोड़ के इन गांवों में कपास की खेती 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो गई थी। जिसके कारण इस बार 4900 हैक्टेयर की बजाय 3 हजार 500 हैक्टेयर में ही कपास की बुआई की गई है। किसानों का कहना है कि कपास का बीज महंगा आता है। कपास की खेती में थोड़ी बचत ठीक होती है। जिसके कारण कपास की खेती अधिक होने लगी हैं लेकिन, इन गांवों में फैक्ट्रियों की दूषित हवा खेती को बर्बाद कर रही है। जानकार लोगों ने बताया कि कुछ फैक्ट्रियों में खरपतवार बनाने की दवा बनती है। फैक्ट्रियों की प्रदूषित हवा खड़ी खेती के पत्तों को बंदर के पंजों की तरह मुरझा देती है।
स्पेशल टीम ने की जांच
यह सही है कि इन गांवों में कपास की खेती में बंदर पंजा रोग लग रहा है। पत्तियां बंदर के पंजे की तरह मुड़ जाती हैं। जिससे फसल की ग्रोथ रुक जाती है। चार वैज्ञानिकों की टीम ने यहां आकर जांच की है। जिन्होंने भी रिपोर्ट में माना है कि पर्यावरण संतुलन बिगडऩे व फैक्ट्रियों की दूषित हवा इस रोग का कारण हो सकता है।
गोकुलराम, सहायक निदेशक, कृषि विस्तार बहरोड़
Published on:
01 Aug 2019 02:04 pm
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