
रीजनल रेपिड ट्रांसिट सिस्टम (आरआरटीएस) के तहत दिल्ली से मेरठ के बीच रेपिड रेल पिछले दिनों शुरू हुआ, लेकिन दिल्ली-अलवर रैपिड रेल कॉरिडोर के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना होगा। इसका कारण है कि दिल्ली- अलवर प्रोजेक्ट को दिल्ली सरकार की सैद्धांतिक सहमति है, लेकिन अभी वित्तीय सहमति मिलने का इंतजार है।
इसके बाद ही केन्द्र सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकेगी। यानी बहरोड़, नीमराणा, अलवर में रेपिड संचालन के लिए कुछ समय इंतजार करना होगा। दिल्ली- अलवर मार्ग का कार्य तीन चरणों में पूरा होगा। इसमें 164 किलोमीटर ट्रैक पर 22 स्टेशन होंगे। 2028 तक यह ट्रैक बनकर तैयार होना है।
ट्रैक का कार्य तीन चरणों में होगा पूरा
आरआरटीएस के पहले चरण में दिल्ली से गुरुग्राम, दूसरे चरण में गुरुग्राम से बहरोड़, नीमराना और तीसरे चरण में बहरोड़, नीमराना से अलवर तक कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। पहले फेज में 106 किलोमीटर लंबाई में कार्य होगा। दूसरे में 35 किलोमीटर और तीसरे फेज में 58 किलोमीटर लंबाई में ट्रैक तैयार किया जाएगा। इस कॉरिडोर में 70.5 किलोमीटर एलिवेटेड ट्रैक तथा 36 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक तैयार होगा।
निगाहें दिल्ली- अलवर कॉरिडोर पर टिकी
दिल्ली सराय काले खां से गुड़गांव होते हुए अलवर तक के ट्रैक के लिए दिल्ली व केन्द्र सरकार की मंजूरी जरूरी है। हरियाणा और राजस्थान सरकारें पहले ही इस प्रोजेक्ट को अपने अधिकार क्षेत्र में विस्तार की मंजूरी दे चुकी है। दिल्ली सरकार की वित्तीय स्वीकृति के अभाव में यह रैपिड रेल परियोजना कई सालों से अटकी है। दिल्ली सरकार की ओर से वित्तीय सहमति की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही दिल्ली-अलवर (164 किमी) परियोजना सार्वजनिक निवेश बोर्ड और कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजी जाएगी।
ट्रैक पर 22 स्टेशन बनेंगे
दिल्ली- अलवर आरआरटीएस प्रोजेक्ट के पहले फेज के 106 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 16 स्टेशन होंगे। इनमें सराय काले खां, जोरबाग, मुनिरका, एक्सपोसिटी, उद्योग विहार, सेक्टर 17, राजीव चौक, खिड़की धौला, मानेसर, पंचगांव, बिलासपुर चौक, धारूहेड़ा, एमबीआईआर, रेवाड़ी, बावल, एसएनबी, खैरथल, अलवर स्टेशन होगा।
Published on:
03 Nov 2023 11:23 am
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