
राजस्थान रोडवेज की बस। पत्रिका फाइल फोटो
Rajasthan RoadwaysNews राजस्थान पथ परिवहन निगम के अलवर और मत्स्य नगर डिपो में चालक-परिचालकों की कमी के चलते कई बस रूट प्रभावित हो रहे हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से नई भर्ती नहीं होने के कारण रोडवेज को उपलब्ध स्टाफ से ही अतिरिक्त कार्य करवाना पड़ रहा है।
दोनों डिपो में 80 से ज्यादा की कमी है। वर्तमान बस बेड़े के अनुसार अलवर डिपो में संख्या पूरी है, लेकिन किसी के अवकाश पर चले जाने के कारण कई चालक-परिचालकों को डबल ड्यूटी करानी पड़ती है। वहीं, मत्स्य नगर डिपो में परिचालकों की कमी ज्यादा है। इस वजह से यहां कई चालकों से परिचालक का काम करवाया जा रहा है। बस स्टैंड पर टिकट विंडो पर भी कई चालक-परिचालकों की ड्यूटी लगा रखी है।
दोनों डिपो में 30 से 25 अनफिट चालक-परिचालक भी हैं, लेकिन उन्हें फील्ड में नहीं उतारा जा सकता है। अगर दुर्घटना हो जाए तो जवाबदेही रोडवेज प्रशासन की होती है। इसी तरह कई चालक-परिचालकों से ऑफिस का काम कराया जाता है। हालांकि रोडवेज प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अन्य काम कर रहे चालक-परिचालकों को हर महीने 3 हजार किमी बस में चलना होगा। कई कर्मचारी फील्ड में नहीं उतरे, इस वजह से उनकी तनख्वाह रुक गई है।
हर साल दोनों डिपो में कई चालक-परिचालक सेवानिवृत भी हो रहे हैं। उनकी जगह दूसरी नियुक्ति नहीं होने से परेशानी हो रही है। हालांकि रोडवेज ने अनुबंध पर चालक-परिचालक ले रखे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें ज्यादा होने की वजह से कई बार उन्हें हटाना पड़ रहा है।
मत्स्य नगर की बात की जाए तो जयपुर और दिल्ली रूट पर बसें बढ़ाने की आवश्यकता है। अगर चालक-परिचालकों की संख्या ज्यादा होगी तो इन रूट पर बसें बढ़ाई जाएंगी। इसी तरह अलवर डिपो से यूपी के कई लंबे रूट पर बसें नहीं हैं।
चालक-परिचालकों की कमी है। मुख्यालय को लिखकर भेज रखा है। अगर संख्या पूरी हो तो कुछ रूट पर बसें बढ़ाने का प्लान है - कुलदीप शर्मा, मुख्य प्रबंधक, मत्स्य नगर डिपो
Published on:
02 Jan 2026 11:56 am
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