
कभी अलवर की इस नदी का उफान दूर से डराता था, अब 20 साल से वेंटिलेटर पर है यह नदी
अलवर. कई जिलों की करोड़ों की आबादी की जीवन डोर साहबी नदी खुद 20 साल से वेंटिलेटर पर है। कभी इस नदी का उफान दूर से ही डराता था। करीब आधा किलोमीटर चौडाई और 5 फीट गहराई तक जब नदी परवान पर होती थी तो दोनों तरफ के रास्ते बन्द हो जाते थे।
सच यही है कि साहबी नदी का अतिक्रमियों ने गला घोंटा है और बारिश की कमी से चौतरफा सूखा ही सूखा हो गया है। पूरा अलवर जिला डार्क जोन में आ चुका हैं। पहले इतना पानी आता था कि साहबी नदी एक महीने तक बहती रहती थी। अब पानी बहकर नहीं चल रहा है। साहबी नदी का जीवन लाखों की जीवन डोर के रूप में टूटता जा रहा है। प्रशासन ने अतिक्रमियों को नहीं हटाया तो आगे और भी मुश्किल के दिन आने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि नदी के आसपास के पेड़ तक काट दिए गए।
रुका नहावनी नदी का बहाव
साहबी नदी प्रमुख नदी है। इसके अलावा नहावनी नदी में पानी बहाव रुक गया। यह नदी हाजीपुर, हमीरपुर, चूला, रामपुर के पहाड़ों से निकल हरसोरा बांध में आती थी। उसके बाद चूडला, चिरुनी, रामबास, मुडिया खेडा, माजरी, जसाईद्व नांगल उदिया होकर बिजवाड चौहान होते हुए साहबी नदी में मिल जाती है।
अजीतगढ़ से निकलती है
साहबी नदी शाहपुरा तहसील के अजीजगढ़ अमरसर की पहाडिय़ों से निकलकर उत्तरपूर्व की ओर दादू का, नंगली बास, जोधपुरा, कोटपूतली, चतुर्भुज से हरियाणा में प्रवेश कर यमुना में मिलती है। यह नदी वर्तमान में अलवर जिले के बानसूर व जयपुर के कोटपूतली के मध्य सीमा रेखा बनाती हुई दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है। नगदी बास, सियसावास, बामनवास, चतुर्भुज व टापरी गांव नदी के किनारे बसे हैं।
नदी का अस्तित्व संकट में
जयपुर के शाहपुरा से कोटपूतली, अलवर से हरियाणा में प्रवेश कर यमुना नदी में मिलने वाली यह नदी करीब आधा किलोमीटर चौड़ाई साहबी नदी का अस्तित्व ही संकट में हैं। नदी के किनारे बसे सोड़ावास, माजरी खोला, करनीकोट, मुण्डंवाडा, बीजवाड़, भजनवास, क्यारा, नालपुर, दूनवास सहित अनेक गोंवों के लोग नदी के विकराल रूप से बचाव के लिए साहबी माता की नौती मांगते थे व नारियल की भेंट चढ़ाते थे। लेकिन अब मानसून की बेरुखी और अतिक्रमण के कारण पानी आना ही बंद हो गया। इस बार औसत से ठीक बारिश हो रही है। फिर भी साहबी नदी चल नहीं सकी है।
तेज बारिश होने पर साहबी के सब रास्ते खुल सकते हैं। नदी व नालों का बहाव पुन: शुरू हो सकता है।
राजेश वर्मा, अधिशासी अभियंता सिंचाई खण्ड अलवर
सरकारी जमीन व नदी नालों केबहाव क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। नदी में खेती भी करना गैर कानूनी है।
पंकज बडगुर्जर तहसीलदार मुण्डावर
Published on:
24 Aug 2018 11:13 am
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