
बेटे के साथ संजय सूरी
Succsess Story: भिवाड़ी (अलवर)। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल नौकरी की और फिर अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में ही लाखों रुपए का नुकसान हुआ, लेकिन हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। कठिन परिश्रम, तकनीकी कौशल और लगन के दम पर खुद को एक सफल उद्योगपति के रूप में स्थापित किया। यह प्रेरक कहानी है भिवाड़ी के उद्योगपति संजय सूरी की।
संजय सूरी ने बताया कि उनका जन्म 10 नवंबर 1965 को चंडीगढ़ में हुआ। उनके पिता सतपाल सूरी मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर थे। उन्होंने वर्ष 1987 में टूल एंड डाई मेकिंग में इंजीनियरिंग की। पढ़ाई पूरी करने के बाद मोहाली स्थित एक सेमीकंडक्टर कंपनी में सेक्शन हेड के रूप में नौकरी शुरू की, जहां उनका वेतन 1800 रुपए प्रतिमाह था। नौकरी के दौरान उन्होंने कंपनी के लिए कई आयातित टूल विकसित किए, लेकिन शुरू से ही खुद का व्यवसाय करने का सपना था।
उन्होंने जॉब वर्क के रूप में अपना काम शुरू किया। शुरुआत में काम अच्छा चला, लेकिन कई कंपनियों ने भुगतान नहीं किया और उनके करीब छह लाख रुपए बाजार में फंस गए। उस समय यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी थी। उन्होंने बताया कि व्यवसाय शुरू करने के लिए पिता से उधार लिया था, लेकिन रकम डूबने के बाद वे पूरी तरह आर्थिक संकट में आ गए।
सूरी ने बताया कि मुश्किल समय में उन्होंने हार नहीं मानी। पहले जहां वे खुद कच्चा माल खरीदकर उत्पाद तैयार करते थे, वहीं बाद में दूसरों के माल पर तकनीकी विशेषज्ञ के तौर पर काम करना शुरू किया। वर्ष 1991 में वे भिवाड़ी आ गए और यहां एक भूखंड खरीदकर काम शुरू किया। उस समय उनके क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी थी। भिवाड़ी में एक बड़ी चश्मा कंपनी के लिए उन्होंने कई टूल और टेस्टिंग मशीनें तैयार कीं। इसी दौरान वे गुरुग्राम की एक इटली की कंपनी से जुड़े और उन मशीन पार्ट्स को देश में तैयार करना शुरू किया, जो पहले विदेशों से आयात किए जाते थे।
वर्ष 1994 में उनका विवाह वंदना सूरी से हुआ। वंदना सूरी स्कूल में कॉमर्स विभाग की हेड थीं, लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर पति के व्यवसाय में सहयोग करना शुरू किया। वर्ष 2004 में उन्हें आंध्रप्रदेश के चित्तूर में एक बड़े प्लांट के निर्माण का ऑर्डर मिला। यह देश का अपनी तरह का पहला प्लांट था। इस परियोजना के सफल होने के बाद उद्योग जगत में उनकी अलग पहचान बन गई। आज वे देश की कई नामचीन कंपनियों के लिए प्लांट स्थापित कर चुके हैं। संजय सूरी बताते हैं कि आज उनके साथ 60 परिवार जुड़े हुए हैं और कंपनी करोड़ों रुपए का कारोबार कर रही है।
सूरी ने बताया कि शुरुआती नुकसान ने उन्हें जिंदगी की बड़ी सीख दी। उन्होंने कहा कि मेहनत और लगन से ही सफलता मिलती है। पहले वे केवल मैकेनिकल कार्य करते थे, लेकिन वर्ष 2018 में बेटे भानूप्रताप सूरी के व्यवसाय से जुड़ने के बाद उन्होंने मेकाट्रोनिक्स ऑटोमेशन को भी शामिल किया। अब उनकी कंपनी स्मार्ट कन्वेयर सिस्टम तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले यूरोप, अमेरिका और जर्मनी से स्मार्ट कन्वेयर सिस्टम आयात किए जाते थे, लेकिन अब वे इन्हें देश में ही विकसित कर रहे हैं।
Published on:
18 May 2026 03:11 pm
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