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सरिस्का का जंगल, बाघों के लिए इसलिए है बेहद ख़ास व अनुकूल

सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद कर रहा है। जबकि बाघ आमतौर पर औसतन 15-16 साल तक जीवित रहते हैं, सरिस्का में कई बाघ 18-19 साल तक जीवित रहे हैं।

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,Sariska forest is very special and favorable for tigers

सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद कर रहा है। जबकि बाघ आमतौर पर औसतन 15-16 साल तक जीवित रहते हैं, सरिस्का में कई बाघ 18-19 साल तक जीवित रहे हैं। सरिस्का में प्राकृतिक मौत वाले बाघों की उम्र करीब 18 साल रही, हालांकि कुछ बाघों की असमय भी मौत हुई, लेकिन उसके पीछे बीमारी या अन्य कारण नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के शिकार की प्रवृति रही।

सबसे लंबा जीवन जीया बाघिन एसटी-2 ने

सरिस्का में सबसे लंबे समय तक बाघिन एसटी-2 जीवित रही। यह बाघिन करीब साढ़े 19 साल जीवित रही। अंतिम समय में इस बाघिन की पूंछ पर घाव हो गया था, जिसका कई बार इलाज कराया गया, हालांकि लंबी आयु के चलते बाघिन एसटी-2 ने मंगलवार को सरिस्का में आखिरी सांस ली। इसके अलावा बाघिन एसटी-3, बाघ एसटी- 6 की करीब 18 साल की उम्र में मौत हुई।

इसलिए मिलता है लंबा जीवन

सरिस्का में बाघों को लंबा जीवन मिल पाने का कारण यहां की भौगोलिक परिस्थिति एवं प्राकृतिक संसाधन हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यहां का जंगल बाघों के अनुकूल है। खास बात यह कि यहां बाघों के लिए भोजन की समस्या नहीं है। यहां पानी की सुविधा भी बेहतर है, साथ ही हरियाली एवं विचरण के लिए खुला जंगल है। इस कारण सरिस्का बाघों को लंबी आयु देने वाला जंगल रहा है।

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7 बाघों की मौत, दो हुए लापता

वर्ष 2005 के बाद सरिस्का में अब तक 7 बाघों की मौत हुई है, वहीं दो अभी लापता हैं। मृत बाघों में बाघ एसटी-1 की जहर देने, बाघिन एसटी-2 व 3 की प्राकृतिक मौत, बाघ एसटी- 4 व 6 की बीमारी में मौत, बाघिन एसटी-5 व बाघ एसटी-13 लापता तथा बाघ एसटी-11 की खेत में लगे फंदे में फसने तथा बाघ एसटी- 16 की हीट स्ट्रोक से मौत हुई। सरिस्का में यदि वनकर्मियों की नफरी पूरी रहती तो बाघ एसटी-1, बाघिन एसटी- 5, बाघ एसटी-11 एवं 13 को बचाया जा सकता था।

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