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सरिस्का में बाघिन ST-22 ने दिया दो शावकों को जन्म, अब कुल संख्या पहुंची 54

राजस्थान के अलवर में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद और बड़ी खबर सामने आई है। यहां की बाघिन एसटी-22 (ST-22) ने दो शावकों को जन्म दिया है। इन नए मेहमानों के आने के बाद अब सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़कर कुल 54 हो गया है।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 26 May 2026, 12:00 PM IST

sariska tiger reserve

दोनों शावकों के साथ बाघिन ST-22 (फोटो- सरिस्का)

सरिस्का में बाघिन ST-22 ने दो शावकों को जन्म दिया है। सरिस्का प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार यह खुशखबरी तालवृक्ष रेंज क्षेत्र से आई है, जहां बाघिन एसटी-22 अपने इन दो नए शावकों के साथ देखी गई है। इस खबर के बाद से ही वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। नए शावकों के जन्म की पुष्टि होते ही वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

संबंधित तालवृक्ष रेंज में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। बाघिन और उसके बच्चों की चौबीसों घंटे निगरानी करने के लिए वनकर्मियों की विशेष टीमों को तैनात किया गया है, जो पारंपरिक और आधुनिक तरीकों से नियमित मॉनिटरिंग कर रही हैं।

पानी की पूरी व्यवस्था

फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का मौसम चल रहा है, इसलिए बाघिन और उसके नन्हे शावकों की सुरक्षा और आराम हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। गर्मी की तपिश को देखते हुए उस पूरे इलाके के सभी प्राकृतिक जल स्रोतों और कृत्रिम वाटर पॉइंट्स को पानी से भरवा दिया गया है। वन विभाग का पूरा प्रयास है कि इस संवेदनशील समय में मां और बच्चों को पानी की तलाश में ज्यादा दूर न भटकना पड़े और उन्हें किसी भी तरह की असुविधा या खतरा न हो।

अब संख्या हुई 54

यह कामयाबी सरिस्का के इतिहास में एक मील का पत्थर है। याद दिला दें कि साल 2005 में एक ऐसा दौर भी आया था जब सरिस्का पूरी तरह से बाघविहीन हो गया था। वहां एक भी बाघ नहीं बचा था। उसके बाद प्रशासन, सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञों के प्रयासों और बेहतर प्रबंधन की बदौलत आज सरिस्का ने यह मुकाम हासिल किया है। शून्य से शुरू हुआ यह सफर आज 54 बाघों तक पहुंच चुका है, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस ख़ुशी को राज्य वन मंत्री संजय शर्मा ने भी सोशल मिडिया पर शेयर किया है।


वन अधिकारियों का कहना है कि सरिस्का में लगातार की जा रही मॉनिटरिंग, अवैध शिकार पर पूरी तरह से लगाई गई रोक और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से ही बाघों की आबादी में यह बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। इस खबर से न सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी। सरिस्का वैसे भी देसी और विदेशी सैलानियों के बीच बाघों के दीदार के लिए काफी मशहूर है। अब कुनबा बढ़ने से यहां आने वाले पर्यटकों के लिए रोमांच और ज्यादा बढ़ जाएगा। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए वन विभाग सुरक्षा को ही सबसे बड़ी प्राथमिकता मानकर चल रहा है।