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नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ के साथ विद्यार्थी विदाई समारोह मनाया

विधालय के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के विदाई समारोह में नाैकुंडी गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें महायज्ञ के माध्यम से देश के भविष्य में सुसंस्कृति की जागृति उत्पन्न करने तथा समाज में व्याप्त संस्कारों के विघटन को दूर करने की शिक्षा दी गई।

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बारा भडकोल के गायत्री शक्तिपीठ में विद्यार्थी विदाई समारोह के अवसर पर आयोजित महायज्ञ के दौरान सतीश बडाया ने कहा कि गायत्री परिवार मनुष्य के अंदर इंसानियत उत्पन्न करने व संस्कारवान बनाने का निरंतर प्रयास विगत कई वर्षों से करता रहा है। इसी परपेक्ष में गायत्री शक्तिपीठ बारा भडकोल द्वारा एक निजी विधालय के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के विदाई समारोह में नाैकुंडी गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया।

जिसमें महायज्ञ के माध्यम से देश के भविष्य में सुसंस्कृति की जागृति उत्पन्न करने तथा समाज में व्याप्त संस्कारों के विघटन को दूर करने की शिक्षा दी गई। दिन प्रतिदिन अपनी संस्कृति को भूल विदेशी संस्कृति को अपनाकर मानव संस्कारों से विमुख होता जा रहा है। तथा हैवानियत का शिकार हो रहा है। आज का युवा रास्ते से भटक गया है। भविष्य बड़ा संकट में है।

विधार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए गायत्री परिवार निरंतर गायत्री महामंत्र के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संस्कारों को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रहा है। दीक्षांत समारोह के संचालन में भूरमल जांगिड़ ने गौ,गंगा,गीता व गायत्री को भारतीय संस्कृति की आधारशिला पर प्रमुखता से व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में सतीश बडाया, हरिकिशन यादव, नरसी प्रजापत,राजेश गोयल, खिल्लू राम जांगिड़ सहित गायत्री परिवार के अनुयायी मौजूद रहे।