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Rajasthan: सोलर कैमरों से सैन्य इलाकों की जासूसी! जांच एजेंसियां अलर्ट; अलवर-बीकानेर से हटाए कैमरे

Solar Camera Spy Case: अलवर सहित प्रदेश कुछ अन्य जिलों में सैन्य छावनियों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर कैमरों के जरिए सेना की गतिविधियों पर नजर रखने का मामला सामने आया है।

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अलवर

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Anil Prajapat

Apr 17, 2026

Solar Camera

Photo: AI generated

अलवर। अलवर सहित प्रदेश कुछ अन्य जिलों में सैन्य छावनियों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर कैमरों के जरिए सेना की गतिविधियों पर नजर रखने का मामला सामने आया है। हालांकि आर्मी इंटेलिजेंस और पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

बताया जा रहा है कि अलवर और बीकानेर में लगे इन सोलर कैमरों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से हटवाया गया है। ये कैमरे सैन्य ठिकानों के आसपास लगाए गए थे, जिनके माध्यम से सेना की आवाजाही पर नजर रखी जा रही थी।

अलवर से एक संदिग्ध को हिरासत में लेने की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक इन कैमरों की लाइव फुटेज पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ तक पहुंचाई जा रही थी और इन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था। इस मामले में अलवर से एक संदिग्ध को हिरासत में लेने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि जांच के सिलसिले में करीब पांच दिन पहले एक टीम अलवर पहुंची थी, जिसके बाद से एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल में जुटी हुई हैं।

आतंकी संगठन बब्बर खालसा से जुड़ा नेटवर्क

जानकारी के अनुसार कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला, मोगा, अंबाला, कठुआ, बीकानेर और अलवर में सैन्य व सुरक्षा ठिकानों के पास ऐसे सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनकी संख्या करीब 9 बताई जा रही है, जिन्हें आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया गया है। यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ और प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़ा बताया जा रहा है।

दिल्ली और पंजाब तक फैला नेटवर्क

जासूसी के इस तंत्र में शामिल लोगों को सेना और अर्धसैनिक बलों की गतिविधियों की जानकारी जुटाने, फोटो-वीडियो बनाने और संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने का जिम्मा दिया गया था। यह भी चर्चा है कि इस मामले से जुड़े तार दिल्ली और पंजाब तक फैले हुए हैं, जहां से 11 संदिग्ध जासूसों और आतंकियों को डिटेन किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

इससे पहले मार्च 2026 में भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुहेल गैंग से जुड़े लोगों को पकड़ा था, जो इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे। इन कैमरों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की गतिविधियों, हथियारों की आवाजाही और संवेदनशील ठिकानों की रियल टाइम निगरानी करना था।