
पशुओं में फैल रहा यह खतरनाक रोग, आप भी संभलकर पीएं दूध, हो सकती है यह घातक बीमारी
अलवर. सड़ी, गली व बदबूदार खाद्य सामग्री खा रहे शहर के लावारिस पशुओं में फैलता थनैला रोग आमजन के लिए चिंता का विषय है। खासकर उन परिवारों के लिए जो लावारिश पशुओं से निकल रहा दूध घरों में काम ले रहे हैं। लावारिस पशुओं में थनैला होने का कारण पशु चिकित्सक मान रहे हैं कि लगातार सड़ी गली साग, सब्जी, दलिया, सड़ा चारा व अन्य बदबूदार सामग्री लगातार खाने से होता हैं जिसमें पशुओं के थन का आकार भी बदलता जाता है।
सावधान रहने की जरुरत क्यों
अलवर शहर में करीब 3 हजार से अधिक लावारिश पशु सडक़ों पर ही घूमते हैं। दिन रात कचरे में मुंह मारते हैं। सड़ा गला सामान खाते रहते हैं। जब पशु लगातार ऐसा भोजन करता हैं तो संक्रमण का डर बढ़ता जाता है। पशु बीमार होते रहते हैं। तभी तो लावारिस पशुओं को गोबर सामान्य रूप से अलग आने लगता है जिसमें तेज बदबू आती है। कभी कार्बोहाड्रेट ज्यादा खाने दूध की गुणवत्ता कमजोर हो जाती है। प्रॉटीन अधिक आने से एल्काइन बढ़ जाता है। कई बार थनों के जरिए खून का छिछड़ा आना शुरू हो जाता है। थनों में सूजन भी आ जाती है। दूध का स्वाद भी बदलता जाता है।
तो पूरा दूध हो सकता है संक्रमित
पशु चिकित्सकों के अनुसार लावारिस पशुओं से शहर में करीब 10 से 15 हजार लीटर दूध सप्लाई हो रहा है। यदि इसमें दस प्रतिशत दूध भी थनैला रोग से प्रभावित पशुओं का आ रहा है तो पूरा दूध संक्रमित हो सकता है। जिसको पीने से हानिकारक असर होता है।
इन बातों का ध्यान रखें
दूध का स्वाद बदलने लगे तो दूध भी बदल लें। दूध को गर्म करके ही उपयोग में ले। सीधा काम में लेने की गलती नहीं करें। कई बार दूध में अलग-अलग तरह की गंध आने लग जाती है। ये सब कारण थनैला ग्रस्ति पशुओं के दूध के लक्षण हो सकते हैं।
Published on:
03 Sept 2018 10:38 am
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