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पकड़ में नहीं आ रहा पैंथर… बढ़ गया खतरा, अफसरों ने किया नया खुलासा

लोगों को भी अलर्ट किया गया है। वन विभाग के अफसरों ने नया खुलासा भी किया है। अफसर मान रहे हैं कि आरआर सर्किल में यह पैंथर

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अलवर के आरआर कॉलेज में विचरण कर रहा पैंथर कॉलेज परिसर में बने एक आवास में पहुंच गया। इस आवास में बाउंड्रीवॉल नहीं थी, इस वजह से पैंथर एक श्वान का पीछा करते हुए यहां घुसा। रात को पालतू श्वान कॉलेज गेट से ही अंदर जा रहा था। आवासीय परिसर में पगमार्क मिले हैं। अलवर वन मंडल के अलावा सरिस्का टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने भी जायजा लिया। टीम ने एक बड़ा पिंजरा और लगाया है, जिसमें बकरा बांधा गया है।

लोगों को भी अलर्ट किया गया है। वन विभाग के अफसरों ने नया खुलासा भी किया है। अफसर मान रहे हैं कि आरआर सर्किल में यह पैंथर अचानक नहीं आया। यहीं पर यह निवास कर रहा है। किसी व्यक्ति को दिखा तो विभाग के संज्ञान में आया। यही कारण है कि यह पकड़ में नहीं आ रहा।

रात भी वह अपने रुटीन पथ पर गुजरा, लेकिन पिंजरों की ओर नहीं देखा। एक्सपर्ट ट्रैंकुलाइज करने का सुझाव दे रहे हैं। वहीं विभाग का कहना है कि दिन में ट्रैंकुलाइज करने पर वह गुस्से में आबादी की ओर भी रुख कर सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है। ऐसे में ट्रैैंकुलाइज से पहले पिंजरे के जरिए ही उसे पकड़ने के प्रयास जारी रहेंगे।

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आया और निकल गया

कॉलेज परिसर में लगाए गए पिंजरों के पास से पैंथर गुजरा, लेकिन इधर-उधर भी नहीं देखा। मुर्गा, मेमना व बकरा पिंजरे में ही बंधे रहे। सीसीटीवी में हर दिन की तरह तस्वीर आ रही हैं। पैंथर के स्वभाव से विभाग को लग रहा है कि यह पैंथर की टेरेटरी है। दिन में घनी झाड़ियों में रहता है। दिन में जनता के मूवमेंट के चलते वह नहीं निकलता। अब सवाल यह भी उठता है कि वन विभाग टाइगर, पैंथर जैसे मुय वन्यजीवों की मॉनिटरिंग क्यों नहीं कर पा रहा।

कॉलेज में अलर्ट के पोस्टर

कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों की आवाजाही हो रही है। ऐसे में उन्हें अलर्ट किया गया है। इसके लिए कॉलेज में पोस्टर लगाए गए हैं ताकि विद्यार्थी अलर्ट रहें।

दहशत बढ़ रही

अलकापुरी, बैंक कॉलोनी, शांतिकुंज, मोती डूंगरी कॉलोनी के लोगों में दहशत हर दिन बढ़ रही है। उन्होंने सुबह-शाम टहलना बंद हो गया है। रात को भी लोग नहीं निकलते। घर का दरवाजा भी सुबह डरकर खोलते हैं।

पैंथर झाड़ियों में ही काफी समय से रह रहा है। वह पिंजरों के आसपास से हर दिन गुजर रहा है, लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा। ट्रैंकुलाइज करना आसान नहीं है। क्योंकि वह आबादी में भी जा सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है, इसलिए पिंजरे के जरिए ही पकड़ने के प्रयास चल रहे हैं। - राजेंद्र हुड्डा, डीएफओ अलवर

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