
अलवर. जिले की कठूमर विधानसभा क्षेत्र के खेरली कस्बे के अस्पताल को तत्कालीन राज्य सरकार की बजट घोषणा में उप जिला अस्पताल का दर्जा तो दे दिया, लेेकिन यहां सुविधाओं की दृष्टि से अस्पताल ग्रामीण पीएचसी के जैसा ही प्रतीत होता है। खेरली में उप जिला अस्पताल की घोषणा के बाद चिकित्सकों के 20 पद एवं नर्सिंग स्टाफ के 45 पद स्वीकृत हो गए, लेकिन वित्तीय स्वीकृति के अभाव में अभी नवीन नियुक्ति नहीं हुई है। यहां स्टाफ व चिकित्सकों की कमी का खमियाजा रोगियों को हो रहा है। उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। विशेषकर यहां महिला रोग विशेषक का पद लंबे अर्सें से खाली चला आ रहा है। इस पर नियुक्ति के कोई प्रयास नहीं होने से महिला मरीजों व प्रसूताओं को चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल रही है।
वर्तमान में 9 चिकित्सक कार्यरत हैं, जिनमें 3 वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, 3 दंत रोग विशेषज्ञ, 1 शिशु रोग विशेषज्ञ, 1 हड्डी रोड विशेषज्ञ और 1 एनेस्थीसिया के है, वहीं दो संविदा कर्मियों सहित कुल 18 नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी कई वर्षों से हैं। इस कारण संपूर्ण व्यवस्थाएं होने के बाद भी यहां प्रसूताओं को सुविधा नहीं मिल रही। प्रसव यहां होते हैं, उनमें प्रसूताओं को सुविधाओं के नाम पर कुछ भी प्राप्त नहीं होता। यहां जनवरी माह से अब तक चार माह में 46 प्रसव हुए हैं। इसका कारण है कि यहां की अव्यवस्थाओं के कारण कोई प्रसव के लिए आता ही नहीं है। यदि कोई आता भी है तो ऑन ड्यूटी चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ ही प्रसव कराता है। महिला नर्सिंग कर्मी की ड्यूटी होने पर वह प्रसूता के साथ रहती है अन्यथा पुरुष कर्मी ही प्रसव कराते हैं। प्रसव पश्चात प्रसूताओं को जिस वार्ड में रखा जाता है, वहां पूर्ण रूप से सफाई का अभाव है। बेड पर बेतरतीब गंदी चादर पड़ी रहती है और शौचालय भी गंदगी से भरे है। वार्ड में एक भी नर्सिंग कर्मी नहीं रहता। नर्सिंग कर्मी सामान्य वार्ड में रहते हैं, जहां से उन्हें बार-बार जाकर बुलाना पड़ता है।
कई गांवों के लोगों का भार
खेरली सामुदायिक चिकित्सा केन्द्र पर कस्बे सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की चिकित्सा का भी भार है। जहां से मौसमी बीमारियों के मरीजों के अलावा आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों का उपचार भी यहां किया जाता है। चिकित्सा स्टाफ व चिकित्सकों के अभाव में यहां सभी चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो रही है।
कई पद खाली है
चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकित जेटली का कहना है कि उप जिला अस्पताल की घोषणा हो गई है, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बजट नहीं आया है। इसलिए पद खाली हैं। आचार संहिता के बाद ही कुछ होने की उम्मीद है। अस्पताल में प्रसव कराने से संबंधित सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त है। स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण महिलाएं अथवा उनके परिजन यहां प्रसव नहीं कराते हैं।
नियुक्ति प्राथमिकता रहेगी
कठूमर विधायक रमेश खींची का का कहना है कि यह पूर्ववर्ती सरकार की खमियां रही है, जिनमें केवल घोषणाएं की, उनका क्रियान्वन नहीं किया। अभी आचार संहिता लगी हुई है। इसके बाद आवश्यकतानुसार सभी रिक्त पदों को भरा जाएगा। स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन की नियुक्ति उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी। इस बारे में वे मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे तथा अस्पताल को लेकर चर्चा करेंगे। क्षेत्रवासियों को हो रही समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
Published on:
22 Apr 2024 11:16 pm
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