
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
अलवर जिले को पर्यटन का हब माना जाता है, लेकिन सरकार अलवर के पर्यटन का गला घोटने में लगी है। सार्वजनिक पर्यटन स्थलों की हालत काफी बदतर बनी हुई है। जहां पर्यटक जाने से भी कतराते हैं। वहीं, सरिस्का बफर जोन सहित जिलेभर में कई जगह प्राइवेट हेरिटेज होटल और रिसोर्ट बन गए हैं, जो कि पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं।
अलवर जिले में सरिस्का, बालाकिला, सिलीसेढ़, अजबगढ़, भानगढ़, मूसी महारानी की छतरी, सागर, किशनकुंड, फतेहजंग गुम्बद और म्यूजियम सहित 25 से ज्यादा पर्यटन स्थल हैं जो कि पर्यटन विभाग के अंतर्गत आते हैं। इन पर्यटन स्थलों की सार-संभाल पर पर्यटन विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इन पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। कई पर्यटन स्थलों की हालत काफी जर्जर हो चुकी है तथा कहीं पर्यटकों के पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
अलवर में 150 से ज्यादा बड़े होटल-रिसोर्ट
अलवर जिले में फिलहाल 150 से ज्यादा बड़े होटल-रिसोर्ट हैं, जिनमें 10 से ज्यादा कमरे हैं। अलवर शहर सहित सरिस्का बफर जोन में सिलीसेढ़, नटनी का बारां, हाजीपुर ढडीकर, राजगढ़ रोड, कटीघाटी रोड आदि जगह कई हेरिटेज होटल और रिसोर्ट बन गए हैं। जहां पर्यटकों को लुभाने के लिए आकर्षक रूम, गार्डन, देसी खाना, ऊंट-घोड़ों की सवारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित अनेक सुविधाएं दी हुई हैं। इन प्राइवेट होटल और रिसोर्ट की सुविधाओं को देखकर पर्यटक काफी आकर्षित हो रहे हैं। वीकेंड पर शनिवार और रविवार को इन होटल-रिसोर्ट में पर्यटकों की जबरदस्त भीड़ रहती है। वहीं, सरकारी पर्यटन स्थल सूने पड़े रहते हैं।
फैक्ट फाइल
वर्ष-2022
देसी पर्यटक आए - करीब 194000
विदेशी पर्यटक आए - करीब 1900
समाजकंटकों का लगा रहता है जमावड़ा
जिले के सरकारी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं किए हुए हैं। सरकारी पर्यटन स्थलों पर समाजकंटकों और नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। वहां पर्यटकों के अभद्रता और छेड़छाड़ तक कर दी जाती है। वहीं, यहां लोग खुले में बैठकर शराब पीते रहते हैं। जिससे बाहर से आने वाले पर्यटक इन स्थलों पर जाना कम पसंद कर रहे हैं।
Published on:
09 Jul 2022 09:38 am
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