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कंधे पर बैग टांगकर घर से निकली तीन साल की पीहू को मिली मां की गोद

भिवाड़ी ञ्च पत्रिका. मजदूर परिवार की बच्ची अचानक घर से निकल आई और मेगा हाईवे पर सड़क के बीचों बीच चलने लगी। भारी वाहन उसे बचाकर निकलने लगे। इसी समय उस बच्ची पर महिला अधिकारी की नजर पड़ी और सड़क के बीच में ही गाड़ी को रोककर बच्ची को सुरक्षित किया और उसकी मां को सौंपकर उन्हें मुस्कुराने का अवसर दे दिया। बच्ची को पाकर मां की आंखों से भी खुशी के आंसू निकल पड़े।

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कंधे पर बैग टांगकर घर से निकली तीन साल की पीहू को मिली मां की गोद

कंधे पर बैग टांगकर घर से निकली तीन साल की पीहू को मिली मां की गोद

भिवाड़ी ञ्च पत्रिका. मजदूर परिवार की बच्ची अचानक घर से निकल आई और मेगा हाईवे पर सड़क के बीचों बीच चलने लगी। भारी वाहन उसे बचाकर निकलने लगे। इसी समय उस बच्ची पर महिला अधिकारी की नजर पड़ी और सड़क के बीच में ही गाड़ी को रोककर बच्ची को सुरक्षित किया और उसकी मां को सौंपकर उन्हें मुस्कुराने का अवसर दे दिया। बच्ची को पाकर मां की आंखों से भी खुशी के आंसू निकल पड़े।
सीआईडी इंचार्ज भिवाड़ी प्रीति राठौड़ और हेड कांस्टेबल विकास शर्मा ने बताया कि ऑफिस के काम से भिवाड़ी से तिजारा जा रहे थे। करीब 12 बजे का समय था। मटीला चौकी से आगे भिवाड़ी-अलवर मेगा हाईवे पर रोड के बीच में एक तीन साल की बच्ची चलते हुए दिखाई दी, हाईवे पर इधर-उधर से वाहन निकले जा रहे थे। वाहन चालक गति धीमी कर और एक दूसरे को इशारा कर बच्ची को बचाते हुए निकले जा रहे थे। जब हमें बच्ची खतरे में दिखाई दी तो हमने गाड़ी को रोड के बीच में रोककर ट्रैफिक को भी रोका जिससे कि बच्ची की जान को कोई खतरा न हो। पास जाकर देखा कि बच्ची रो रही है, उसके कंधे पर छोटा स्कूल बैग भी था।


बच्ची को गोद में लेकर रोड साइड में लिया। बच्ची से उसके परिजनों के बारे में पूछना शुरू किया वह कुछ नहीं बता सकी, बच्ची काफी घबराई हुई थी। आसपास की दुकानों पर पूछताछ शुरू की। पास में स्थित बिहारी मजदूरों की बस्ती में भी जाकर बच्ची को दिखाकर पूछा। काफी देर बाद पता चला कि बच्ची के पिता एसआरएफ कंपनी में मजदूरी करते हैं, जिनका नाम उमेश पासवान हैं, बच्ची के परिजन वहीं एक बस्ती में रहते हैं। मां सोसायटी में सफाई का काम करती है और वह काम करने गई थी। एसआरएफ के अधिकारियों से संपर्क कर पिता से बात की। पिता ने मां को सूचना देकर हमारे पास भेजा। मां ने बताया कि उसका पांच का बेटा स्कूल जाता है और बच्ची पीहू को वह कमरे में ही बाहर से दरवाजा बंद कर काम करने जाती है। बच्ची वहीं अंदर रहती है, दरवाजा खोलकर वह कैसे बाहर निकली कुछ कह नहीं सकते। बच्ची मां को देखकर उससे लिपट कर रोने लगी। बच्ची को मां को सुपुर्द किया।