
अरावली विहार में यूआईटी के फ्लैट्स। फोटो: पत्रिका
अलवर। यूआईटी की ओर से करीब 17 साल पहले गरीबों के लिए बनाए गए फ्लैट्स में से 50 फीसदी पर अब अमीर परिवारों के कब्जे हैं। यानी जिनको फ्लैट यूआईटी ने दिए थे, उन्होंने बेच दिए। प्राइम लोकेशन पर होने के कारण अमीर परिवारों ने यहां किराएदार रख दिए। फ्लैट्स की हालत जर्जर है। सुविधाओं का अभाव है।
यूआईटी ने वर्ष 2008-09 में अरावली विहार फेज प्रथम व द्वितीय योजना लॉन्च की। यह योजना गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए सूर्य नगर के मुख्य मार्ग पर ही बनाई गई थी। प्राइम लोकेशन पर बनाए गए करीब 600 आवास लॉटरी सिस्टम से दिए गए। हालांकि सभी फ्लैट्स बुक नहीं हो पाए थे।
एक फ्लैट की कीमत करीब तीन से चार लाख रुपए के मध्य रखी गई थी। तीन मंजिला यह फ्लैट बनकर तैयार हो गए। गरीब परिवार रहने लग गए, लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते लोग दूसरे एरिया में चले गए। बुद्ध विहार में भी इस योजना का विस्तार करके करीब 344 फ्लैट दिए गए, लेकिन वहां भी सुविधाओं का अभाव है। यूआईटी के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रकरण दिखवाएंगे।
फ्लैट्स में रह रहे किराएदार विनोद कुमार, सत्यवीर सिंह का कहना है कि जिनको यह फ्लैट मिला था, वह किसी पैसे वाले व्यक्ति को बेच गए। उन्होंने हमें किराए पर दिया है। हम लंबे समय से यहां रह रहे हैं। यहां की निवासी सीमा का कहना है कि उन्होंने भी फ्लैट मूल आवंटियों से खरीदा है।
इस तरह अन्य परिवार भी यहां किराए पर रहते हैं। मुख्य सड़क के पास बने होने के कारण फ्लैट के खरीदार यहां आ रहे हैं। फ्लैट्स की हालत यहां ठीक नहीं है। यह जर्जर अवस्था में हैं। पानी के लिए टंकी है, लेकिन कभी आता है तो कभी नहीं। सीवर लाइन भी है, लेकिन आए दिन चोक होती है। बारिश में कई फ्लैट्स की छतें भी टपक रही हैं।
यूआईटी ने तीन मंजिला भवन बनाए थे। गरीब परिवारों को यह दिए थे। यूआईटी ने यहां सुविधाएं भी दी थी, लेकिन लोगों को इसे मेंटेन करना था, जो नहीं हो पाया। रेजीडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के जरिए यूआईटी यहां की सुविधाओं का संचालन कराए ताकि लोगों को सहूलियत मिल सके। फ्लैट्स बेचने का मामला जांच का विषय है और उसकी शर्तें भी देखी जानी चाहिए।
-प्रमोद शर्मा, रिटायर्ड एक्सईएन, यूआईटी
Published on:
08 Sept 2025 01:15 pm
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