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Video : राजस्थान के अलवर जिले में अजमीढ़ महाराज जयंती पर निकली शोभायात्रा, प्रदेश भर के लोग हुए शामिल

चांदी के कलश की बोली भागीरथ सोनी ने 221000 रूपए में छुड़ाई। शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए मैरिज होम पर विसर्जित हुई।

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अलवर

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aniket soni

Oct 05, 2017

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Celebrations on Ajmeedh Maharaj Jayanti in alwar







अलवर.

मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की ओर से अजमीढ़ महाराज की जयंती पर बुधवार को शोभायात्रा का आयोजन किया गया। शोभायात्रा को होली ऊपर स्थित राधाकृष्ण मंदिर से यूआईटी चेयरमैन देवीसिंह शेखावत व मोहित यादव ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया।

इस दौरान चांदी के कलश की बोली भागीरथ सोनी ने २२१००० रूपए में छुड़ाई। इसके बाद शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए डीपीएस मैरिज होम पर विसर्जित हुई। यहां हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज के युवक-युवतियों से पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ कर समाज का नाम रोशन करने की बात कही। इस मौके पर समाज की प्रतिभाओं व मित्रों का भी सम्मान किया गया। समाज के जिलाध्यक्ष श्याम सोनी, कोषाध्यक्ष हरीराम सोनी, शोभायात्रा संयोजक रतनलाल सोनी ने अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में अलवर के अलावा जयपुर , दौसा, सीकर,चूरू, झुंझुनंू, मारवाड़ हार्दिक मेवाड़ समेत प्रदेश के बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजलाल मेवाड़ थे। जबकि अध्यक्षता मेड क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के प्रदेश अध्यक्ष शिवप्रसाद ने की। इस अवसर पर महासचिव बहादुर सिंह, दुलीचंद सोनी पीपाड़ सिटी, महिला प्रदेश अध्यक्ष लीलावती, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष मनवीर लांबा, प्रदेश महामंत्री बजरंगलाल, प्रदेश उपाध्यक्ष मातादीन, जगदीश प्रसाद, रामकिशोर, बहादुर सिंह सुगंध , मुकेश सोनी, नरेश सोनी, जवाहर लाल सोनी, हरिगोपाल सोनी एवं अजय सोनी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।

शरद पूर्णिमा पर धार्मिक कार्यक्रम आज

आश्विन शुक्ल पूर्णिमा पर गुरुवार को जिले भर के मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मध्य रात्रि को १२ बजे मंदिरों में भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाएगा। महताब ङ्क्षसह का नौहरा निवासी पंडित यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा इस दिन पृथ्वी के सबसे निकट होता है। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार भगवान कृष्ण ने आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी।

मान्यताओं के अनुसार शहर पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्रमा से अर्मत की वर्षा होती है। इसलिए इस दिन खीर बनाकर रात्रि में इसे चन्द्रमा की रोशनी में रखा जाता है, जिसके बाद रात्रि १२ बजे भगवान को भोग लगाकर इसका प्रसाद वितरित किया जाता है। वहीं इस दिन से ही एक माह की अवधि के लिए कार्तिक स्नान भी शुरू होंगे। इस अवधि के दौरान महिलाओं की ओर से सूर्योदय से पूर्व ठंडे जल से स्नान किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिरों में कार्तिक महात्म्य के आयोजन होंगे।