
father and four children murder in alwar
अलवर.
घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की सुनकर बच्चों की नानी विजय भी बख्तल की चौकी से चलकर शिवाजी पार्क पहुंची। एक ही झटके में भरे-पूरे परिवार व घर के तबाह होने से वह अपने आंसू नहीं रोक सकी और फूट-फूटकर रोने लगी। यही हाल बनवारी की बहन सुमन का था। घटना की सुनकर सुमन नगर (भरतपुर) से अपने ससुरालीजनों के साथ अलवर आई और रोते-रोते बेहोश हो गई। लोगों ने उसे पानी पिलाया, लेकिन इसके बाद भी उसकी बेहोशी टूटने का नाम नहीं ले रही थी।
कॉलोनी की महिलाओं ने उसे ढांढस बंधाया, लेकिन उसके मुंह से बार-बार यहीं निकल रहा था कि भगवान तूने यह क्या किया? उधर, बनवारी के पिता मुरारी का तो जैसे सब कुछ लुट गया। सामान्य चिकित्सालय की मोर्चरी के बाहर वह एक कोने में बैठे-बैठे रो रहे थे। उनके मुंह से बार-बार यही निकल रहा था कि भगवान बेटे व बच्चों की जगह उसे उठा लेता। इस दिन को देखने से तो अच्छा था कि मर जाता। उन्होंने बताया कि वे करीब डेढ़ साल बाद अपने गांव गए थे। उन्हें क्या पता था कि पीछे से ऐसा हो जाएगा। यदि पता होता तो वे घर से हिलते तक नहीं।
बेहोश हुई पत्नी, अस्पताल में कराया भर्ती
घटना का पता चलते ही बनवारी की पत्नी संतोष बेहोश हो गई। उसे लोग सामान्य चिकित्सालय लेकर पहुंचे। यहां तबीयत ज्यादा बिगडऩे पर उसे मनोचिकित्सा के महिला वार्ड में भर्ती कराया गया। उसकी निगरानी के लिए पुलिस ने एक महिला सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी भी लगाई। पुलिस सब इंस्पेक्टर सुशीला मीणा ने बताया कि संतोष के चिकित्सकों ने ड्रिप लगाई। होश आने पर वह हर बार एक ही बात कह रही थी कि उसे उसके पति व बच्चों के पास ले चलो।
शहर विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे
शहर में एक साथ पांच जनों की हत्या की हृदय विरादक घटना की सूचना पर शहर विधायक बनवारीलाल सिंघल सहित कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। वहीं, बनवारी के घर के बाहर दिनभर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। जैसे-जैसे लोगों को घटना की सूचना मिलती गई। वैसे-वैसे ही उनके कदम स्वत: ही घटनास्थल की ओर मुड गए। घटना की सूचना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली, पीसीसी सदस्य नरेन्द्र शर्मा, दीपेन्द्र सैनी, पार्षद डॉ. अशोक पाठक, राजेश तिवाड़ी, अशोक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और घटना की निंदा की।
पिता फैक्ट्री में नौकरी करता था
परिवार का मुखिया बनवारी हैवल्स फैक्ट्री में इलेक्ट्रीशियन था। अपने व छोटे भाई के परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। दरअसल, उसका छोटा भाई मुकेश कोई कामकाज नहीं करता। उसे मंडलियों में तबला व हारमोनियम बजाने का शौक है। परिवारीजनों के अनुसार मुकेश शनिवार को ही घर से एक मंडली में हारमोनियम बजाने जैतारण (पाली) निकल गया। उसका मोबाइल भी घर पर छूट गया, जो बनवारी के पिता मुरारी के पास था।
एक दिन पहले ही मां-बाप गए थे गांव
बनवारी के साथ शिवाजी पार्क स्थित किराए के मकान में उसके बूढ़े मां-बाप भी रहते थे। सोमवार सुबह वे दीपावली पर घर की साफ-सफाई करने गांव चले गए। गांव जाने को लेकर मां-बाप के बीच कहासुनी भी हुई। मां अभी रुकने की कह रही थी, जबकि बाप मुरारी गांव जाने की जिद कर रहा था।
कविता के सूखे आंसू
शिवाजी पार्क में घटी घटना के बाद जहां सगे-संबंधियों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं मृतक बनवारी के छोटे भाई मुकेश की पत्नी कविता की आंखों के आंसू सूख गए। वह एकटक निहार रही थी। घर में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी उसकी आंख से एक आंसू भी नहीं झलका। घर व आस-पड़ोस की महिलाएं उसे सहारा दिए हुए थी और उसे ढांढस बंधा रही थी। खास बात ये है कि सुबह सबसे पहले घटना की जानकारी कविता को ही लगी थी। वह सुबह करीब ६ बजे ऊपर के कमरे से नीचे आई तो उसे कमरे से खून बहता दिखा। इसकी सूचना उसने अपनी बड़ी बहन (जेठानी) संतोष को दी। इसके बाद घर में कोहराम मच गया।
सगी बहनें है दोनों भाइयों की पत्नियां
बनवारी व उसके छोटे भाई मुकेश की पत्नियां सगी बहनें हैं। इसके चलते दोनों के बीच संबंध भी काफी मधुर थे। दोनों बहनें साथ-साथ घर का कामकाज निपटाती थी और बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजती थी। पड़ोसियों के अनुसार उन्होंने कभी दोनों बहनों को झगड़ते नहीं देखा। दोनों बहनें कभी कभार ही घर से बाहर निकलती थी। ज्यादातर समय उनका कामकाज में गुजरता था।
Published on:
04 Oct 2017 06:38 pm
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