
अलवर शहर में विकास की बात करने वाले जिम्मेदारों को एक बार तुलेड़ा गांव का श्मशान घाट ज़रूर देखना चाहिए, जहां मरने के बाद भी इंसान को चैन नहीं। हाल ही में बारिश के कारण टूटी श्मशान की बाउंड्री से गंदे नाले का सड़ा पानी अंदर भर गया और कीचड़ से पटी ज़मीन पर अंतिम संस्कार करना लोगों के लिए मजबूरी बन गया।
तुलेडा निवासी 40 वर्षीय महेन्द्र जाटव का शव कानपुर से तुलेड़ा गांव लाया गया, तो उनके परिजनों को कीचड़ से सने हालातों में चिता जलानी पड़ी। स्थानीय निवासी सुभे सिंह यादव ने बताया कि यह श्मशान घाट लगभग 40-50 साल पुराना है और यहां वर्षों से कोई देखरेख नहीं हुई। हाल ही में हुई बरसात में श्मशान घाट की बाउंड्री पूरी तरह टूट गई, जिससे गंदे नाले की गंदगी अंदर भर गई। अब पानी सूख गया है, लेकिन कीचड़ जस की तस है।
जिला पार्षद जगदीश जाटव ने भी कहा कि यह श्मशान घाट पांच साल पहले मंत्री टीकाराम जूली के कार्यकाल में इसकी बाउंड्री कराई गई थी, लेकिन अब हालत बेहद दयनीय है। अधिकारी मौके का मुआयना कर लौट जाते हैं, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।
Published on:
03 Jul 2025 05:59 pm
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