विश्व रंगमंच दिवस पर गुरुवार को अलवर रंगम महोत्सव का समापन हो गया। अंतिम दिन थियेटर के मंझे हुए कलाकार राजेंद्र गुप्ता और हिमानी शिवपुरी में दमदार अभिनय कर लोगों की तालियां बटोरी। दोनों कलाकारों ने राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में अपने अनुभव साझा किया। अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने कहा कि कितनी ही वेबसीरिज आ जाए थियेटर कभी खत्म नहीं हो सकता। पेशे है बातचीत के अंश…
Q थियेटर से जुड़ने का मौका कब मिला?
उत्तर – स्कूल में एक बार नाटक किया था। वह सबको बहुत पसंद आया, बहुत तालियां बजी। तब मुझे लगा कि यही मेरा रास्ता है। मैं नाटक करने लग गई। इसके बाद देहरादून में पढ़ाई पूरी की और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रशिक्षण लिया और थियेटर से जुड़ गई।
Q टीवी पर ब्रेक कैसे मिला और पहला अनुभव कैसा रहा?
उत्तर – जब में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़ी तो मुंबई में काम करने का मौका मिला। यहां पर हमराही नाटक में काम करने का ऑफर आया तो मैंने हां कर दी। इस नाटक में मुझे देवकी भाभी का किरदार मिला, जिसने मुझे बहुत पहचान दिलाई। इसके बाद हम आपके हैं कौन, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, हीरो नंबर 1, दीवाना मस्ताना सहित कई फिल्में मिली। मेरे अभिनय को सराहा गया और काम मिलता गया।
Q युवाओं की थियेटर से दूरी है, कैसे जोड़ा जा सकता है?
उत्तर – यह अपनी-अपनी पसंद होती है, हम किसी को भी जबरन थियेटर से नहीं जोड़ सकते हैं। यह कहना गलत है कि युवा थियेटर से कम जुड़ रहे हैं। अलवर में ही देख लें, थियेटर फेस्टिवल में जो नाटक हो रहे हैं उसमें युवा ज्यादा हैं। थियेटर में जुड़कर सुकून महसूस होता है। आप अच्छा काम कर रहे हैं तो बहुत पसंद किए जाएंगे, इसलिए युवा जुड़ रहे हैं।
Q फिल्म, वेब सीरीज के जमाने में थियेटर का भविष्य क्या है?
उत्तर – जब फिल्में आई तो लोग सोचते थे कि थिएटर कम हो जाएगा। जब वेब सीरीज आई तो लगा की फिल्में कम हो जाएंगी, लेकिन मैं कहूंगी कि चाहे फिल्में आएं या वेब सीरीज या कोई और मनोरंजन का नया साधन, थियेटर की जगह कोई नहीं ले सकता। इसके दर्शक पहले भी थे, आज भी है और आगे भी रहेंगे। इसकी जगह कोई नहीं ले सकता।
थियेटर कलाकार राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अलवर में 100 दिन का थियेटर फेस्टिवल होना कलाकारों के लिए बहुत गर्व की बात है। खास बात यह है कि ज्यादातर नाटक दूसरे शहरों से हैं। मैं हैरान हूं,आखिर ये कैसे हो पाया। इतने दिन तक कलाकारों को जोडे रखना मुश्किल काम है।
अलवर ने इतिहास रच दिया
बड़े महानगरों में आज तक इस तरह का प्रयास नहीं हुआ, लेकिन अलवर ने इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि महानगरों में अपनापन नहीं है, एक दूसरे के लिए समय नहीं है। वहां लोग अपने को बड़ा समझते हैं। जब मैं अलवर या दूसरे छोटे शहरों में थियेटर करने जाता हूं तो मुझे लोगों का बहुत प्यार मिलता है। जो मुझे बड़े शहरों में नजर नहीं आता। मैं पहले भी अलवर आया हूं आगे भी मुझे अलवर आने का मौका मिला तो में जरूर आऊंगा। थियेटर मेरी रग रग में बसा है।
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