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सरिस्का में ट्रांजिक्ट लाइन वन्यजीव गणना 21 से, पहले चार दिन मांसाहारी वन्यजीवों की गणना

प्रशिक्षण दिया, फॉर्मूले पर चुप्पी साधी

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अलवर

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Prem Pathak

May 20, 2018

wild animal counting in Sariska tiger project alwar

सरिस्का में ट्रांजिक्ट लाइन वन्यजीव गणना 21 से, पहले चार दिन मांसाहारी वन्यजीवों की गणना

अलवर सरिस्का बाघ परियोजना में 21 ये 28 मई तक होने वाली ट्रांजिक्ट लाइन आधारित वन्यजीव गणना के लिए सरिस्का के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें ट्रांजिक्ट लाइन पर गणना के तरीके पर तो चर्चा हुई लेकिन वन्यजीवों की गणना के फार्मूल पर ज्यादातर अधिकारी चुप्पी साध गए और गणना की गेंद भारतीय वन्यजीव संस्थान के कर्मियों के पाले में डाल दी।

यह होगी ट्रांजिक्ट लाइन गणना

ट्रांजिक्ट लाइन गणना सरिस्का की 104 बीटों में दो-दो ट्रांजिक्ट लाइन पर की जाएगी। इसमें प्रत्येक 400 मीटर की दूरी पर 1500 मीटर का सर्किल डालकर जानवरों की प्रजाति का पता लगाया जाएगा। इस दौरान वन्यजीवों के पगमार्क, स्केट, खंरोच व अन्य किसी भी प्रकार की सूचना को शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि वन्यजीव गणना में जीपीएस का उपयोग होगा। बाद में प्रपत्रों में वन्यजीवों की जानकारी भर फार्मूले के आधार पर गणना की जाएगी।
सरिस्का में मांसाहारी व शाकाहारी वन्यजीवों की गणना सोमवार से शुरू होगी। इसमें 1600 मीटर से अधिकतम 2 किलोमीटर तक ट्रांजिक्ट लाइन पर 400-400 मीटर की दूरी पर वन्यजीवों की गणना होगी। इसमें पहले चार दिन मांसाहारी वन्यजीवों की गणना होगी। वहीं शेष तीन दिन शाकाहारी वन्यजीवों की गणना होगी। साथ ही वनस्पति, अवैध चराई व अवैध कटान तथा मानवीय दखल का भी आंकलन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में वन्यजीव गणना वाटर होल्स एवं ट्रांजिक्ट लाइन आधार पर होती थी। पिछले कुछ वर्षों से अब केवल ट्रांजिक्ट लाइन से ही गणना कराई जाती है।

सरिस्का कर्मियों को नहीं पता गणना का फार्मूला

वन्यजीव गणना का शुक्रवार को सरिस्का के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें ट्रांजिक्ट लाइन पर की जाने वाली गणना के बारे में बताया गया। वहीं गणना के दौरान दिखाई देने, पगमार्क व अवशेषों के आधार पर चिह्नित वन्यजीवों की गणना के फार्मूले पर ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई। इस कारण वन्यजीवों की गणना का कार्य अब भारतीय वन्यजीव संस्थान के सरिस्का में तैनात कर्मियों को सौंपने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि ट्रांजिक्ट लाइन पर वन्यजीव गणना साल में दो बार होती है।