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Exclusive : नियम-कानून ताक पर रखकर फर्जी ठेकदारों को दे दिए करोड़ों के टेंडर, भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा !

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावे पर उनके ही अधिकारी लगा रहे ग्रहण...

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प्रदीप मौर्य
अंबेडकरनगर. सबका साथ सबका विकास और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन जैसे नारों का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में ही बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। मामला जिले के टांडा नगर पालिका का है, जहां पालिका के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर तीन करोड़ से अधिक धनराशि का शिलान्यास सांसद डॉ. हरिओम पाण्डेय और भाजपा की स्थानीय विधायक संजू देवी के हाथों से करवा दिया। 16 कार्यों के लिए कराये गए इस शिलान्यास कार्यक्रम के बारे में जो जानकारी मिली है, वह काफी हैरान कर देने वाली है।

नियमानुसार वर्तमान समय में प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार दो लाख से अधिक की धनराशि के कार्यों के लिए ई-टेंडर के माध्यम से ही निविदा स्वीकृत की जा सकती है। टेंडर भी ई-टेंडर के माध्यम से 23 अक्टूबर को कराया गया था, लेकिन इस टेंडर प्रक्रिया में बड़ा गोरखधंधा नगर पालिका के ईओ और अवर अभियंता की मिलीभगत से कर दिया गया है।

भाजपा सांसद और विधायक से ही करवा दिया शिलान्यास
24 अक्टूबर को नगर पालिका परिसर में भाजपा सांसद डॉ. हरिओम पाण्डेय और विधायक संजू देवी ने जब 16 कार्यों का शिलान्यास किया था, तब शायद ही उनको इस बात की जानकारी रही हो कि जिन कार्यों का शिलान्यास उनसे कराया जा रहा है, उसमें किस स्तर तक भ्रष्टाचार किया गया है। शायद इसी लिए मीडिया से बात करते समय सांसद हरिओम पाण्डेय ने यहां तक कहा था कि बीते कार्यकाल में नगर पालिका में जबर्दस्त लूट-खसोट मची हुई थी, लेकिन अब ऐसा नहीं चलने पाएगा। उन्होंने कहा था कि पिछले चेयरमैन के कार्यकाल में नगर पालिका को भ्रष्टाचार का अड्डा बना लिया गया था।

अवैध तरीके से मिल गया टेंडर
नगर पालिका एक स्वायत्त संस्था है। इसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में किसी भी निर्माण अथवा विकास के कार्यों के लिए प्रस्ताव की स्वीकृति नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से ही की जा सकती है। सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार नगर पालिका का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भंग हो चुके बोर्ड से कोई प्रस्ताव पास नहीं किया जा सकता था और जिन 16 कार्यों का शिलान्यास कराया गया है, उसकी मंजूरी नगर पालिका भंग होने से पहले भी नहीं ली गई थी। इसके बावजूद नगर पालिका के ईओ और अवर अभियंता ने एक बड़ा खेल खेलते हुए अपने कुछ चहेते ठेकेदारों को बिना बोर्ड के ही तीन करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के कार्यों को मंजूर करते हुए उसका टेंडर प्रकाशित करवा दिया।

अवैध ठेकेदारों पर कार्यवाही के बजाय उन्हीं को सौंप दिया सारा काम
नगर पालिका टांडा में कुल 27 पंजीकृत ठेकेदार थे, जिनके विरुद्ध एक व्यक्ति ने पिछले वर्ष जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि नगर पालिका में पंजीकृत ठेकेदारों में अधिकांश फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर अपना पंजीकरण कराये हैं। जिलाधिकारी ने इसकी जांच उप जिलाधिकारी टांडा को सौंपी थी। इस जांच में उप जिलाधिकारी ने नायब तहसीलदार व विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता को शामिल करते हुए जांच कराई तो गंभीर मामला सामने आया।

फर्जी हैं ठेकेदार, जांच में हुआ था खुलासा
जांच में सामने आया कि 27 पंजीकृत ठेकेदारों में से 18 ठेकेदार ऐसे हैं, जिनके पंजीकरण में प्रयोग किये गए अनुभव प्रमाण पत्र के या तो विभाग ही नहीं हैं या फिर जिस विभाग से वह अपना अनुभव दिखा रहे थे, वहां उनके अनुभव का कोई रिकॉर्ड ही था। इस रिपोर्ट को जिलाधिकारी को भेजे जाने के बाद जिलाधिकारी से प्राप्त निर्देश के क्रम में उपजिलाधिकारी टांडा ने नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी को अवैध रूप से पंजीकृत ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही के लिए निर्देशित किया था, लेकिन मई 2017 में भेजे गए कार्यवाही के निर्देश को नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी आर डी बाजपेई ने ताक पर रख कर उन्हीं ठेकेदारों में कुछ को तीन करोड़ से अधिक धनराशि का कार्य सौंप दिया।

अवर अभियंता का मोबाइल स्विच ऑफ
भ्रष्टाचार के इस मामले में जब नगर पालिका के अधिकारियों से जानने का प्रयास किया गया तो अवर अभियंता आर सी गुप्ता का मोबाइल दिनभर स्विच ऑफ रहा। ईओ आर डी बाजपेई ने कुछ बताने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पत्रावली जेई के पास है और जब वे आएंगे तभी कोई जानकारी दी जा सकती है।

नगर पालिका टांडा का भ्रष्टाचार से है पुराना नाता
बुनकर बाहुल्य क्षेत्र की नगर पालिका टांडा का भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी पिछले दिनों जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी, उसी समय शासन के निर्देशों के विपरीत इस नगर पालिका के अध्यक्ष हाजी इफ़्तेख़ार अंसारी, अधिशाषी अधकारी आर डी बाजपेई और अवर अभियंता आर सी गुप्ता ने बिना लाइसेंस के ही नगर पालिका के स्लाटर हाउस को बिना किसी पत्रावली के ही लाखों रुपये की लागत से निर्माण प्रारम्भ करा दिया और उसकी नीलामी भी करा दी थी। इसकी शिकायत पर जांच में मामला सही पाए जाने पर अध्यक्ष, अधिशाषी अधिकारी और अवर अभियंता समेत चार लोगों पर शासन की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आपको बता दें कि अवर अभियंता आर डी बाजपेई अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में कई बार निलंबित किए जा चुके हैं।

ठेकेदारों की बोलती है तूती
नगर पालिका टांडा में पंजीकृत कुछ ठेकेदारों की तूती बोलती है। यह वे ठेकेदार हैं जिनका नाता बसपा के शासन काल के चेयरमैन जमीरुल हसन अंसारी से लेकर निवर्तमान हाजी इफ़्तेख़ार अंसारी और अब भाजपा के शासन में भी इनके करीबी रिश्ते भाजपा के नेताओं से हैं। इनमें से एक ठेकेदार शकील अहमद के बारे में बताया जाता है कि लगभग 15 साल पहले इसके पास कुछ ख़ास संपत्ति नहीं थी, लेकिन आज ये करोड़ों के मालिक हैं।

शकील ठेकेदार के पिता नगर पालिका में कर्मचारी थे, जिनकी मौत के बाद इसके एक भाई जलील अहमद को नगर पालिका में नौकरी मिल गई। नियमानुसार किसी कर्मचारी के किसी भी रिश्तेदार को नगर पालिका में ठेकेदारी का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता, लेकिन लोगों की कई शिकायतों के बाद भी इस ठेकेदार पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। आज हालत यह है कि ठेकेदार शकील और उनके साथी ठेकेदार प्रमोद गुप्ता अवैध पंजीकरण के आधार पर ठेकेदारी कर रहे हैं।