1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पुलिस को ढूंढ़े से नहीं मिल रहा था फ्रॉड का आरोपी ग्राम सचिव, सीडीओ ने पकड़वाया

पुलिस के रिकार्ड में यह आरोपी लगातार फरार चल रहा था...

2 min read
Google source verification
Fraud gram sachiv arrested in Ambedkar Nagar UP Hindi news

पुलिस को ढूंढ़े से नहीं मिल रहा था फ्रॉड का आरोपी ग्राम सचिव, सीडीओ ने पकड़वाया

अम्बेडकर नगर.यूपी पुलिस अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर सवालों के घेरे में रहती है। एक बार फिर पुलिस की इसी कार्यशैली पर सवाल खड़ा हुआ है। मामला जिले के कोतवाली टाण्डा से जुड़ा हुआ है। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बसावन पुर में इंदिरा आवास में फर्जी ढंग से पात्र महिला के बजाय अन्य किसी को भुगतान कर दिए जाने को लेकर न्यायालय के आदेश पर दर्ज फ्राड के मुकदमे में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, फ्राड का पैसा लेने वाला व्यक्ति और एक अन्य व्यक्ति जिसने भुगतान लेकर ईंट की रसीद दी थी को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इसमें से ग्राम सचिव यशवंत कुमार को छोड़कर बाकी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 2017 में ही जेल भेज दिया था, लेकिन ग्राम सचिव टाण्डा कोतवाली पुलिस को गत 6 महीने से नहीं मिल रहा था। पुलिस के रिकार्ड में यह आरोपी लगातार फरार चल रहा था।


ग्राम सचिव जिले में ही करता रहा नौकरी

जिस ग्राम सचिव यशवंत कुमार को टाण्डा पुलिस फरार बता रही थी और उसे ढूंढ नहीं पा रही थी, वह टाण्डा विकास खंड से अपना ट्रांसफर कराकर जिले के भीटी विकासखंड में लगातार न सिर्फ अपनी नौकरी करता रहा। बल्कि पूरा वेतन भी उठाता रहा। पुलिस की विवेचना में फरार आरोपी ग्राम सचिव के खिलाफ नियम के मुताबिक तो निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस और विकासखंड के अधिकारियों से मिली भगत का ही नतीजा रहा कि आरोपी ग्राम सचिव बेधड़क होकर नौकरी भी करता रहा और जिले में घूमता रहा।

पुलिस ने भेजा जेल

मामला तब सामने आया जब गत शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी ओपी आर्य ने इस मामले से जुड़ी फाइल देखकर इसमें लिप्त कर्मचारियों को अपने कार्यालय बुलाया। जानकारी के अनुसार विवादित इंदिरा आवास के भुगतान से जुड़े अभिलेख भी इन कर्मचारियों ने गायब कर दिया है। मुख्य विकास अधिकारी की पूछताछ में जब यह मामला साफ हुआ तो उन्होंने टाण्डा पुलिस को बुलाकर तीन कर्मचारियों को पुलिस के हवाले कर दिया। लेकिन नामजद एफआईआर में केवल ग्राम सचिव यशवंत कुमार ही शामिल था, इसलिए बाकी दो कर्मचारी से पूछताछ करके पुलिस ने छोड़ दिया और यशवंत कुमार को जेल भेज दिया।


इस तरह से किया गया था भ्रष्टाचार

मामला टाण्डा विकास खंड क्षेत्र के बसावन पुर गांव का है, जहां एक गरीब पात्र महिला अंतिमा को इंदिरा आवास आवंटित किया गया था। लेकिन आवास मिलने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई और ग्राम प्रधान चंद्रशेखर के सहयोग से उसी गांव की एक अन्य अंतिमा नाम की महिला को फर्जी भुगतान कर दिया गया। जब इसकी जानकारी सही अंतिमा के पुत्र को हुई तो उसने इसकी शिकायत खंड विकास अधिकारी और पुलिस से की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद उसने न्यायालय से एफआईआर दर्ज कराने का आदेश पारित कराया, जिस पर यह मुकदमा दर्ज हुआ था।


इस मामले में पुलिस पर पहले ही लग चुका है घूसखोरी का आरोप

इस मामले में जब कोतवाली टाण्डा में ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तो उस समय कोतवाली टाण्डा में तैनात एसआई राहुल कुमार को इसकी विवेचना सौंपी गई थी। इसी मामले में विवेचक राहुल कुमार और एक आरोपी मुकेश मिश्र का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमे विवेचक ने एफआईआर से मुकेश मिश्र का नाम निकालने के लिए पैसे की मांग कर रहे थे। इस वायरल ऑडियो की खबर पत्रिका में प्रकाशित भी हुई थी।