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राजस्व कर्मी ने खोली एडीएम की पोल, मुआबजे को लेकर हो रही अनियमित कार्रवाई

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 का हो रहे निर्माण मामले में किसानों से अधिग्रहीत की गई जमीनों के मुआबजे को लेकर अनियमित कार्रवाई हो रही है।

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Farmer

अम्बेडकर नगर. जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 का हो रहे निर्माण मामले में किसानों से अधिग्रहीत की गई जमीनों के मुआबजे को लेकर आये दिन किसानों की तरफ से शिकायत की जाती है, लेकिन इन शिकायतों का सही से निस्तारण करने के बजाय अधिकारी गलत निस्तारण करने में जुटे हुए हैं।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें दुद्धी लुम्बनी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 के निर्माण में टाण्डा तहसील क्षेत्र के बढ़ियानी कला गांव की महिला कंचन देवी के खाते की भूमि भी सड़क में निकल गई है। जिस खाते से कंचन देवी की भूमि सड़क निर्माण में गई है। उसी खाते में रूद्र प्रसाद उपाध्याय भी सह खातेदार हैं और जिसमें उनका मकान बना हुआ है। मुआबजे का निर्धारण करते समय रूद्र प्रसाद और कंचन देवी के नाम से मुआबजा बनाया गया, लेकिन रूद्र प्रसाद ने यह कह कर आपत्ति जताई कि सड़क सिर्फ उनके हिस्से की भूमि से जा रही है, जिसमे मुआबजे की राशि सिर्फ उन्हें ही मिलनी चाहिए। आरोप है कि रूद्र प्रसाद के दबाव और प्रभाव के कारण मुआबजे का कार्य देख रहे एडीएम ने दूसरी रिपोर्ट लेखपाल पर दबाव बनवा कर रूद्र प्रसाद के अकेले पक्ष में भुगतान करा देना चाहते हैं।

लेखपाल की बात चीत का ऑडियो हुआ वायरल

एडीएम ने दबाव बनाकर लेखपाल से गलत ढंग से रिपोर्ट तो एक खातेदार रूद्र प्रसाद उपाध्याय के पक्ष में लगवा दिया। जिसके बाद तहसील के अन्य अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट एडीएम को भेज दी है, लेकिन पीड़ित विधवा महिला कंचन देवी के अधिवक्ता मनोज कुमार यादव से लेखपाल ने फोन पर बात करते हुए यह स्वीकार कर लिया है कि एडीएम ने उस पर और तहसीलदार पर दबाव बनाकर रिपोर्ट रूद्र प्रसाद के पक्ष में लगवा दी है। लेखपाल से बात चीत का यही ऑडियो वायरल हो गया है, जिसमें सम्बंधित लेखपाल यह कह रहा है कि एडीएम साहब ने डांट कर उससे रिपोर्ट लगवाई है और लगता है एडीएम साहब कुछ दबाव या पैसे के कारण ऐसा कर रहे हैं। लेखपाल अधिवक्ता मनोज कुमार यादव को फोन पर यह सलाह भी दे रहा है कि वह इसकी पैरवी अन्य अधिकारी से करें, नहीं तो एडीएम पूरी अधिग्रहीत भूमि का मुआबजा केवल रूद्र प्रसाद को ही दिलवा देंगे। बातचीत में लेखपाल यहां तक कह रहा है कि एडीएम साहब सही आदमी नहीं हैं और वह कुछ भी गड़बड़ कर सकते हैं। इसलिए पीड़ित पक्ष इस मामले को लेकर जिलाधिकारी से मिलकर अपना काम करावें नहीं तो सबकुछ गड़बड़ हो जाएगा। लेखपाल ने बात चीत में और क्या कहा, आप खुद भी सुनिए...

इस तरह से की जा रही है अनियमित कार्यवाही

राष्ट्रीय राजमार्ग में प्रभावित किसान कंचन देवी के साथ हो रहे इस खेल का पूरा मामला यह है कि कंचन देवी के पति ओमकार नाथ मिश्र और उनके सगे भाई जनार्दन मिश्र के नाम टांडा तहसील के ग्राम बढ़ियानी की भूमि खसरा नंबर 123 जिसका क्षेत्रफल 0.477 हेक्टेयर है और इस भूमि से जनार्दन मिश्र ने अपना हिस्सा बिना बंटवारे के ही रूद्र प्रसाद को बेंच दिया था, जिसके आधार पर रूद्र प्रसाद ने अपने दबंगई के बल पर सड़क के किनारे की भूमि पर अपना हिस्सा बताते हुए मकान बनाकर कब्ज़ा कर लिए थे।

ओमकार नाथ मिश्र का कुछ दिन बाद अचानक निधन हो गया, जिसके बाद उनकी विधवा पत्नी कंचन देवी ने उपजिलाधिकारी टांडा के न्यायालय में बंटवारे का मुकदमा दायर किया है। जिसमें अभी कोई निर्णय नहीं आया है, लेकिन इसी बीच सड़क के लिए अधिग्रहण की गई भूमि के मुआबजे के लिए सह खातेदार के आधार पर रूद्र प्रसाद के साथ कंचन देवी का नाम भी शामिल कर लिया गया तो उसी को लेकर यह बवाल मचा हुआ है। कंचन देवी के अधिवक्ता मनोज यादव ने बताया कि बिना बंटवारे के किसी एक व्यक्ति को सड़क के किनारे की कीमती भूमि बताकर मुआबजा देना और दूसरे को कुछ न देना गलत और विधि विरुद्ध है। उन्होंने कहाकि अगर कंचन देवी के साथ जिला प्रशासन ज्यादती करने का प्रयास करेगा तो इसका खामियाजा प्रशासन को उच्च न्यायालय में भुगतना पड़ेगा।