
Madarsa
अम्बेडकर नगर. जिन लोगों को देश में राष्ट्रगान और राष्ट्र गीत से परहेज है और उनका धर्म खतरे में दिखाई पड़ने लगा है या फिर जिन राष्ट्रभक्तों को मदरसों में सिर्फ आतंकवाद ही दिखाई पड़ता है, ऐसे धर्म के ठेकेदारों को एक युवा मुस्लिम करार जवाब दे रहा है| अम्बेडकर नगर जिले में एक मदरसा ऐसा है, जहाँ हिन्दू और मुसलमान के बच्चे एक साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। न सिर्फ शिक्षा ही ग्रहण कर रहे हैं बल्कि इस मदरसे का ड्रेस और मदरसे की बिल्डिंग भी भगवा रंग में रंगा हुआ है | यहाँ उर्दू, अरबी के साथ साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान के साथ-साथ अन्य विषयों की शिक्षा भी दी जा रही है | इतना ही नहीं इस मदरसे में रोज सुबह प्रार्थना के साथ राष्ट्रगान और भारत माता की जय के साथ वन्दे मातरम के नारे भी लगते हैं |
जिला मुख्यालय पर स्थित मदरसा फैजाने गरीब नवाज एक ऐसा मदरसा है, जो कट्टर पंथी सोच वाले उन मुसलमानों के लिए करारा जवाब साबित हो रहा है, जो हर बात पर राष्ट्र गान और वन्दे मातरम का विरोध करने से नहीं चूकते हैं| जिला मुख्यालय पर स्थित इस मदरसे में हिन्दू और मुसलमान धर्म के बच्चे पढ़ते हैं और ख़ास बात यह है कि यहाँ पढ़ाने वाले अध्यापक और अध्यापिका भी हिन्दू और मुस्लिम हैं | इस मदरसे में सुबह की शुरुआत उस मालिक की वंदना से होती है, जो इस संसार को चलाता है और उसके बाद इस देश का राष्ट्रगान होता है| अंत में भारत माता की जय और वन्देमातरम का उद्घोष किया जाता है। मदरसे की जो सबसे ख़ास बात है वह है यहाँ की ड्रेस|
मदरसे के प्रबंधक बरकत अली सभी बच्चों को मुफ्त ड्रेस मुहैया कराते हैं, वह भी भगवा रंग का | मदरसे को भी इन्होंने भगवा रंग में रंग दिया हैं | प्रबंधक बरकत अली का मानना है कि इस देश में हिन्दू और मुसलामानों के बीच एकता और भाई चारा कायम करने के लिए उन्होंने भगवा रंग को चुना है | पत्रिका से बात करते हुए बरकत अली ने कहा कि हिंदू समुदाय लोगों की भगवा रंग में आस्था है इसलिए उन्होंने भगवा रंग को लगाया है | राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से किसी को परहेज नहीं होना चाहिए | उन्होंने कहा कि अभी तक तो मुझे किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन अगर कोई मेरा विरोध करेगा तो मैं उसे जवाब देने में सक्षम हूँ | कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों को उन्होंने नसीहत दी कि देश की एकता और अखंडता को न बिगाड़ें |
मदरसे को सिर्फ आतंकवाद से जोड़कर देखना उचित नहीं-
प्रबंधक बरकत अली का कहना है कि 2012 से वे इस मदरसे के प्रबन्धक हैं, तभी से उन्होंने इस मदरसे की ड्रेस को भगवा कर दिया है। इसके पीछे वे अपनी सोच को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि भगवा रंग हिन्दू समुदाय की आस्था का प्रतीक है और यही सोंचकर उन्होंने ड्रेस और मदरसे का रंग भगवा कर दिया है, जिससे हिन्दू भाइयों को इस बात की ख़ुशी हो कि कोई मुस्लिम भी ऐसा है जो भगवा रंग से सिर्फ नफरत नहीं बल्कि प्यार करता है | उनका मानना है कि ऐसा करने से समाज में एक भाई चारे और एकता का सन्देश जाएगा | बरकत अली उन लोगों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहते हैं कि जिन लोगों को मदरसे में सिर्फ फिरका परस्ती और आतंकवाद दिखाई पड़ता है, उन्हें भी यहाँ आकर देखना चाहिए कि कैसे इस मदरसे में हिन्दू और मुस्लिम एक साथ पढ़ भी रहे हैं और पढ़ा भी रहे हैं |
बच्चों और अध्यापिकाओं में है ख़ुशी का माहौल-
इस मदरसे में पढ़ाने का काम करने वाली अध्यापिकाओ का मानना है कि भगवा रंग से उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं है, बल्कि इससे एकता का माहौल बना है और इसी भगवा रंग के कारण आज तमाम हिदू बच्चे भी इस मदरसे में बिना किसी डर व भय के पढने के लिए आते हैं | अध्यापिका फातिमा बानो का कहना है कि मदरसे में पढने वाली हिन्दू बच्चे न सिर्फ गणित, विज्ञान,हिंदी व अन्य विषय पढ़ते हैं बल्कि उर्दू की भी शिक्षा ख़ुशी ख़ुशी ग्रहण कर रहे हैं | अध्यापिका श्रीमती विजय कुमारी और अंतिम भी मानती हैं कि इस मदरसे में बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार किया जाता है और सबको यहं अच्छी शिक्षा मिल रही है |
मदरसे में पढने वाले बच्चों में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा है | रोज प्रातः इस मदरसे में पढने वाले बच्चे अपने भगवा ड्रेस में तैयार होकर यहाँ पहुँचते हैं और बड़े उत्साह के साथ प्रार्थना और राष्ट्रगान गाते हैं। ख़ास बात यह देखने को मिली कि प्रार्थना के समय हिन्दू और मुस्लिम सभी बच्चे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं | मदरसे में पढ़ाये जा रहे विषयों को लेकर सभी बच्चों का कहना है कि यहाँ के टीचर बहुत अच्छे हैं और उन्हें अच्छी शिक्षा दे रहे हैं |
Published on:
21 Sept 2017 09:48 pm
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