
नदी में नहाना एक बार फिर पड़ा महंगा, डूब रही भांजी को बचाने गए मामा की भी हुई मौत
अम्बेडकर नगर. तालाब, नहर और नदी में नहाना अक्सर लोगों के लिए खतरा बन जाता है। अगर तैरना नहीं आता तो कभी भी बिना सुरक्षा उपाय के नहर, तालाब अथवा नदी में नहाने के लिए नही उतरना चाहिए, क्योंकि यह कार्य लोगों के जान पर ऐसे बन आती है, जैसे टांडा तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली घाघरा नदी में नहाते समय मामा भांजी की डूबने से हुई है।
दिल को दहला देने वाली यह घटना टांडा तहसील क्षेत्र के अजमेरी बादशाह पुर गांव के पास से बहने वाली घाघरा नदी में घटी है। यहां सुलतानपुर के जयसिंहपुर के दुगनीपुर निवासी तनु (8) पुत्री अशोक कुमार अपने मामा शेखर कनौजिया (28) पुत्र स्व़ शिवराम निवासी नेहरूनगर कोतवाली टांडा के साथ रिश्तेदार राज कुमार कन्नौजिया निवासी अजमेरी बादशाहपुर फूलपुर कोतवाली टांडा आए थे। जहां घाघरा नदी में भांजी नहा रही थी और अचानक डूबने लगी। इस दौरान मामा शेखर उसे बचाने के लिए नदी में कूदे तो वह भी डूब गए।
गोताखोरों की मदद से मिलीं दोनों लाशें
शुक्रवार को सुबह करीब साढ़े 10 बजे तनु सरयू नदी में स्नान करते समय डूबने लगी। इस बीच बचाने के लिए मामा शेखर ने भी नदी में छलांग लगा दी, लेकिन भांजी को बचाने के चक्कर मे मामा भी डूबने लगे और काफी हाथ पैर मारने के बावजूद वे न तो खुद बच सके और न ही भांजी को बचा सके। इस तरह से दोनों नदी में डूब गए।
सूचना पर गोताखोरों के साथ पहुंची पुलिस
नदी के किनारे मौजूद लोग जब इस घटना को देखे तो किसी की हिम्मत नदी में उतर कर दोनों को बचाने की नही हुई। किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सूचना पर गोताखोरों के साथ पहुंची पुलिस ने गोताखोरों सुरेन्द्र मांझी, अभय मांझी, श्यामलाल, संजीव गौड़, सुरेश कुमार व झिनकान की मदद से दोनों शवों को बाहर निकलवाया। डूबने वालों में शेखर कनौजिया लखीमपुर खीरी में सहायक अध्यापक थे। प्रभारी निरीक्षक टांडा राम लखन पटेल ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उधर परिजनों में कोहराम मच गया है।
Published on:
30 Jun 2018 11:22 am
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