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#KrishnaJanmashtami 2019 : कृष्ण की भक्ति में डूबा मोहम्मद इब्राहिम, नाम बदलकर रख लिया ये

-इस रसखान के आड़े नहीं आता धर्म, कृष्ण की भक्ति में हर साल मनाता है जन्माष्टमी

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#KrishnaJanmashtami 2019 : कृष्ण की भक्ति में डूबा मोहम्मद इब्राहिम, नाम बदलकर रख लिया ये

#KrishnaJanmashtami 2019 : कृष्ण की भक्ति में डूबा मोहम्मद इब्राहिम, नाम बदलकर रख लिया ये

अम्बेडकरनगर. कृष्ण #KrishnaJanmashtami भक्ति ऐसी है कि जो इसमें डूबा, वह दुनिया के सारे भेदभाव से दूर होकर सभी का हो जाता है। ऐसी भक्ति मीरा और रसखान के बारे में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि कृष्ण भक्ति में मीरा ने विष का प्याला तक अमृत समझ कर पी लिया था और रसखान तो कृष्णभक्ति में ऐसा डूबे कि अपना नाम मोहम्मद इब्राहिम से बदलकर रसखान रख लिया और जाकर कृष्ण नगरी ब्रज में ही बस गए। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि रसखान की रचनाएं कृष्ण भक्ति में ऐसी डूबी हुई हैं, जिसका कोई मुकाबला नहीं है।

रसखान तो एक कवि थे, जिनकी रचनायें जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों को कृष्ण भक्ति और प्रेम का ऐसा संदेश देती हैं जो समाज में साम्प्रदायिक सद्भाव स्थापित करती हैं, लेकिन आज के समय मे भी कृष्ण भक्ति की ऐसी मिसाल देखने को मिलती है, जिसमे धर्म आड़े नहीं आता है। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे व्यक्ति की जो धर्म से तो इस्लाम का मानने वाला है और अपनी इबादत नमाज सबकुछ इस्लाम धर्म के अनुसार ही करता है, लेकिन इस व्यक्ति का भगवान कृष्ण से कुछ ऐसा लगाव है, जिसके लिए वह हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर न सिर्फ बड़ी धूमधाम से कृष्ण जन्माष्टमी ही मनाता है, बल्कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में निकलने वाली झांकियों में एक झांकी इस व्यक्ति की भी रहती है।

बड़ी धूम से मनाई जाती है जन्माष्टमी

भक्ति और प्रेम की प्रतिमूर्ति भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव अम्बेडकर नगर जिले में बड़ी धूममधाम से मनाई जाती है। इस मौके पर जिले के टांडा कस्बे में मुस्लिम समाज से जुड़ा हुआ तौकीर बचपन से भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव देखते हुए कृष्ण भक्ति में खुद को भी जोड़ लिया और अब वह परिवारदार होने के बावजूद हरसाल अपने घर पर कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने के साथ ही इस मौके पर दधिकांधव शोभा यात्रा में निकलने वाली झांकियों के साथ अपनी झांकी भी निकलता है। शोभायात्रा में शामिल होने वाले तमाम लोग साहिल के इस भक्ति को देखकर इसे साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल बताते हैं।