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पिता-पुत्र और 2 भालुओं के बीच जंगल में 20 मिनट तक हुई लड़ाई, ऐसे बचाई एक-दूसरे की जान

बड़े भाई के घर से जंगल के रास्ते अलसुबह लौट रहे थे पिता-पुत्र, लहूलुहान हालत में अस्पताल में दाखिल

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Injured father-son

Injured father-son

अंबिकापुर. सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम मड़वासरई जंगल में गुरुवार की तड़के दो भालुओं ने पिता-पुत्र पर हमला कर दिया। इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। लहूलुहान हालत में दोनों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पिता-पुत्र एक दूसरे को जान बचाने के लिए लगभग 20 मिनट तक भालुओं से संघर्ष किया।

इस दौरान जब भालुओं ने पिता पर हमला किया तो पुत्र डंडे से भालुओं को मार कर पिता की जान बचाई। वहीं जब भालुओं ने पुत्र पर हमला किया तो पिता ने भालुओं को पत्थर से मार कर भगाया। इससे दोनों की जान बच गई।


सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम मड़वासरई निवासी 45 वर्षीय बुधेश्वर पिता छोटे चमरू का बड़ा भाई नईहर ग्राम गांती में रहता है। बड़े भाई की पुत्री की शादी के लिए बुधवार को रिश्तेदार आए थे। रिश्तेदारों की सेवा में बुधेश्वर व उसका 17 वर्षीय बेटा जगेश्वर वहां गया था। गुरुवार की तड़के चार बजे पिता-पुत्र वापस अपने घर आ रहे थे।

इसी बीच रास्ते में पडऩे वाले मड़वासरई जंगल में दो भालू ने बुधेश्वर पर हमला कर दिया। इस दौरान पिता की जान बचाने के लिए पुत्र हाथ में रखे डंडे से भालुओं को मारने लगा।

इस दौरान भालुओं ने पिता को छोड़ दिया तथा पुत्र पर हमला कर दिया। पुत्र पर भालुओं को हमला होता देख पिता उठकर खड़ा हो गया और पास में पड़े बड़े पत्थर से भालुओं को मारने लगा। इस दौरान पिता-पुत्र व भालुओं में लगभग २० मिनट तक संघर्ष चला।


भालुओं पर भारी पड़े पिता-पुत्र
20 मिनट तक चले संघर्ष में पिता-पुत्र को भारी पड़ता देख अंतत: भालू वहां से भाग गए। इसके बाद लहूलुहान पिता-पुत्र किसी तरह पास के एक घर में गए और दरवाजा खुलवाकर घटना की जानकारी मोबाइल से परिजन को दी। परिजन मौके पर पहुंचे और दोनों को इलाज के लिए 108 से मैनपाट स्वास्थ्य केन्द्र ले गए।


मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती
मैनपाट अस्पताल से डॉक्टरों ने दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। यहां दोनों को यहां इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि सरगुजा में हाथी व भालुओं का आतंक है।

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