
dead body
अंबिकापुर. सरगुजा एसपी के निर्देश के पर अस्पताल चौकी पुलिस ने रविवार को 2 अज्ञात महिला के शव को मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए प्रबंधन को सुपूर्द कर दिया। एक माह पूर्व मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन ने एसपी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि अगर कोई भी अज्ञात शव मिलता है तो उसे विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए कॉलेज को सुपूर्द करें।
इसके बाद से ही एसपी ने सभी थाना व चौकी को पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए थे। जिन दो महिलाओं के शव मेडिकल कॉलेज को सौंपे गए हैं वे जिंदा रहने के दौरान दर-दर की ठोकरें खाती रहीं। अब मरने के बाद वे समाज के काम आएंगीं। मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स इन पर अपना प्रैक्टिकल करेंगे।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सरगुजा संभाग में मेडिकल कॉलेज अस्पताल खुलना सौभाग्य की बात है। यहां पढ़ाई कर कई विद्यार्थी अच्छे चिकित्सक के रूप में निकलेंगे। इसके लिए मेडिकल की पढ़ाई के साथ-साथ अध्ययन करना जरूरी है। अध्ययन करने के लिए मृत शरीर की जरूरत होती है। लोगों में जागरुकता की कमी के कारण कोई भी देह दान नहीं करना चाह रहा है।
इस समस्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन पीएम लुका ने एसपी सदानंद कुमार को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि अगर क्षेत्र में कोई भी अज्ञात शव मिलता है और उसके परिजन शव को ले जाने में असमर्थ हैं तो वैसे शव को विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए सुपूर्द करें। ताकि विद्यार्थी अध्ययन कर एक कुशल चिकित्सक बन सकें।
इसके बाद एसपी ने जिले के सभी थाना व चौकी प्रभारियों को पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए थे। अलग-अलग स्थानों से दो अज्ञात महिला को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों काफी बीमार थे। इलाज के दौरान शनिवार को एक महिला की मौत हो गई थी।उसकी उम्र लगभग 55 वर्ष थी।
इसके बाद दो दिन तक शव पीएम कक्ष में पड़ा रहा। शव को लेने के लिए महिला के कोई परिजन अस्पताल नहीं आए। वहीं दूसरी महिला की मौत रविवार की सुबह हो गई। इसका नाम कैलाशो बताया जा रहा है। इन दोनों शव को रविवार को अस्पताल चौकी प्रभारी निर्मला कश्यप ने अध्ययन के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन को सुपूर्द कर दिया है।
कॉलेज में रखे जाएंगे शव
अस्पताल चौकी प्रभारी निर्मला कश्यप ने बताया कि दोनों अज्ञात महिला का शव अध्ययन के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सुपूर्द कर दिया गया है। दोनों शव को कॉलेज में सुरक्षित रखा जाएगा। अगर इनके परिजन को पता चलता है और शव लेने आते हैं तो उन्हें शव दे दिया जाएगा।
मौत के बाद आईं बड़े काम
दोनों महिलाएं पूरी जिन्दगी दर-दर की ठोकरें खाती रहीं। इनके परिवार वालों ने भी खुद से दूर कर दिया था। परिवार वालों ने दोनों महिलाओ की कोई खबर नहीं ली। अंतत: दोनों महिलाएं लावारिस ही बनकर दुनिया से चली गईं, लेकिन मौत के बाद उनके मृत देह समाज हित में बड़े काम में उपयोग होंगे।
Published on:
02 Apr 2018 10:13 am
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