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3 किमी तक पथरीली रास्तों से खाट पर लाई गई प्रसूता, फिर 102 हुई नसीब

बिरेंद्रनगर की महिला ने घर पर ही दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म, खून की कमी के कारण बिगड़ी तबीयत, घर तक नहीं पहुंच पाई संजीवनी

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Delivered women on cot

Deliverd women in cot

अंबिकापुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत विरेंद्रनगर के मिठी महुआपारा में बुधवार को एक गर्भवती महिला अनिशा पति रामदेव की डिलिवरी परिजन ने घर में ही कराई थी। डिलीवरी के बाद स्वस्थ शिशु ने तो जन्म लिया लेकिन खून की कमी के कारण शुक्रवार की दोपहर अचानक उसकी तबीयत काफी खराब हो गई।

सुलसुली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक ने महतारी एक्सप्रेस 102 के कॉल सेंटर में फोन कर मदद मांगी। करीब आधे घंटे के भीतर महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी वाहन लेकर विरेंद्रनगर पहुंचे तो मिठी महुआपारा जाने के लिए जंगल व पहाड़ीनुमा रास्ता होने के कारण आगे नहीं बढ़ सके।

इस पर कर्मचारी पैदल ही गांव तक पहुंचे और गंभीर महिला को खाट में ढोकर करीब 3 किलोमीटर का पथरीला रास्ता तय कर बिरेंद्रनगर में खड़ी महतारी एक्सप्रेस तक पहुंचे। फिर यहां से महिला को महतारी एक्सप्रेस से मुरकौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।


वाहन की सुविधा पर सड़क नहीं
सरकार द्वारा गर्भवती व प्रसूता माताओं को घर से अस्पताल तक आने-जाने के लिए 102 वाहन की सुविधा तो दी गई है लेकिन कई स्थानों तक ये वाहन पहुंच भी नहीं पाते हैं। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत अधिकांश कई माताओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। ऐसे में कभी-कभार जच्चा-बच्चा की जान पर बन आती है।

ऐसा ही मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड स्थित ग्राम बिरेंद्रनगर में देखने को मिला। महिला ने घर पर ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। खून की कमी से जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसकी मदद करने 102 वाहन तो समय पर पहुंच गया, लेकिन 3 किलोमीटर की दूरी वह इसलिए तय नहीं कर पाया, क्योंकि वहां पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं था। लिहाजा वाहन को वहीं खड़ा करना पड़ा।

इधर प्रसूता के परिजन खाट से कांधे पर लेकर उसे वाहन तक पहुंचे। इसे विडंबना ही कहेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के कलिए इलाज की सुविधा तो सरकार द्वारा मुहैय्या कराई गई हैं लेकिन बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं।

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