
Nurses protest
अंबिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही व 108 वाहन नहीं मिलने से एक माह पूर्व एक वृद्धा की मौत हो गई थी। सीतापुर विधायक की शिकायत पर कलक्टर ने मामले में अस्पताल प्रबंधन को जांच के आदेश दिए थे। जांच में अस्पताल प्रबंधन ने दोषी पाते हुए एक स्टाफ नर्स व एनएनएम को निलंबित कर दिया है।
इससे नाराज मेडिकल कॉलेज के सभी स्टाफ नर्सों ने शनिवार की दोपहर अस्पताल के बाहर सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन किया। वहीं नर्सों ने अस्पताल का काम-काज सुचारू रखा। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से जो आदेश आया है उस पर द्वारा कार्रवाई की गई है।
यदि निलंबित नर्सें दोबारा जांच में सही पाई जाती है तो उन्हें पुन: बहाल करा दिया जाएगा। इधर नर्सों का कहना था कि इस मामले में केवल नर्स ही जिम्मेदार क्यों हैं? केवल नर्स पर ही कार्रवाई क्यों की गई। इस मामले में डॉक्टर भी जिम्मेदार हैं। नर्सों ने बताया कि यदि 48 घंटे के भीतर निलंबन वापस नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगीं।
ये था मामला
दो सितंबर को मैनपाट निवासी 60 वर्षीय गिरीजावती को तबीयत बिगडऩे पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला का इलाज डॉक्टर अशोक टोप्पो द्वारा किया जा रहा था। महिला की स्थिति को गंभीर देखते हुए उसे रायपुर रेफर कर दिया गया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया गया। महिला २४ घंटे तक वार्ड में ही पड़ी रही।
अंतत: 4 सितंबर को महिला की मौत हो गई थी। इस पर सीतापुर विधायक अमरजीत भगत ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसकी जानकारी मोबाइल पर कलक्टर को दी थी। दूसरे दिन कलक्टर मेडिकल कॉलेज अस्पताल का जायजा लिया और अस्पताल प्रबंधन को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने मामले में जांच के भी आदेश दिए थे।
अस्पताल प्रबंधन ने जांच प्रतिवेदन कलक्टर को सौंपा। कलक्टर के निर्देश पर शनिवार को अस्पताल प्रबंधन ने स्टाफ नर्स अभीचंचला लकड़ा व एएनएम लीला गिरी को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से अस्पताल के सभी विभाग के नर्सों में आक्रोश है।
शनिवार को नर्सों ने अस्पताल के बाहर लगभग 2 घंटे तक नारेबाजी की और सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी नर्स अपने-अपने कामों पर लौट गए। नर्सों का कहना था कि अगर निलंबन वापस नहीं लिया गया तो सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
नर्सें बोली- डाक्टरों को बचाया जा रहा है
जिला प्रशसन के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा दो नर्सों को निलंबित किए जाने से अस्पताल के सभी नर्सों ने शनिवार को अस्पताल के बाहर सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन किया। इसकी जानकारी जब अस्पताल अधीक्षक एके जायसवाल को मिली तो वे नर्सों से मिलने पहुंचे।
नर्सों ने अधीक्षक से कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई गलत है। इसके लिए डॉक्टर भी जिम्मेदार हैं। उन्हें क्यों बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटना दिवस जिम्मेदार अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद भी नर्सों पर कार्रवाई क्यों की जा रही है
दोबारा कराएंगे जांच फिर लेंगे निर्णय
अस्पताल अधीक्षक ने एके जायसवाल ने विरोध कर रही नर्सों से कहा कि यह कार्रवाई जिला प्रशासन के आदेश पर किया गया है। इस मामले में जांच की जाएगी। आप लोगों का भी बयान लिया जाएगा। अगर जांच में सही पाई जातीं हैं तो जिला प्रशासन को अवगत कराया जाएगा और पुन: निलंबन वापस लिया जाएगा। अगर जांच के दौरान इस मामले में कोई और जिम्मेदार होता है उने उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ वीआईपी मरीजों के लिए पर ही मेहरबानी क्यों?
विरोध कर रहीं नर्सांे ने अस्पताल अधीक्षक से कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाएं चौपट होती जा रही हंै। हमलोग काफी कम स्टाफ होने के बाद भी काम कर रहे हैं। इसके बावजूद भी हम पर ही कार्रवाई की जा रही है। अगर अस्पताल में वीआईपी मरीज पहुंचता है तो इसके लिए जिला प्रशासन के सारे अधिकारी व अस्पताल प्रबंधन मौजूूद रहते हंै। बाकि के मरीजों को हमलोगों के ऊपर छोड़ दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि वे अस्पताल प्रबंधन को मरीजों की हर समस्याओं से मोबाइल से अवगत कराते रहते हैं। फिर भी उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है।
Published on:
07 Oct 2017 04:09 pm
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