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अंबिकापुर. गर्भवती महिला को प्रसव के लिए शुक्रवार की सुबह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच में भर्ती कराया गया था। यहां महिला चिकित्सक पहलेे नॉर्मल डिलीवरी का इंतजार करतीं रहीं फिर रात 12 बजे तक जब नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई तो स्टाफ नर्स ने महिला के पति को बुलाकर बताया कि शनिवार की सुबह ऑपरेशन होगा।
दूसरे दिन सुबह 9 बजे ऑपरेशन के लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। महिला के पति ने फार्म पर साइन भी कर दिया। इसके बावजूद भी चिकित्सक ने उसका ऑपरेशन नहीं किया। महिला का पति बाहर बैठकर ऑपरेशन का इंतजार करता रहा। दोपहर दो बजे तक जब पति से नहीं रहा गया तो उसने स्टाफ कक्ष में जाकर पूछा तो नर्स ने बताया कि बच्चे की धड़कन बंद हो गई है।
इसके बावजूद भी महिला चिकित्सक शाम 6 बजे तक बच्चे के शव को नॉर्मल तरीके से बाहर आने का इंतजार करतीं रहीं। वहीं महिला के परिजन ने महिला चिकित्सक डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
परिजन का कहना है कि वे शनिवार को ड्यूटी पर नहीं आईं थीं। इस कारण ऑपरेशन नहीं हो सका और बच्चे की मौत गर्भ में ही हो गई। यह खबर सुनते ही प्रसूता व उसके पति रो पडे।
सूरजपुर जिले के पंडरी निवासी 28 वर्षीय ललन प्रसाद पत्नी 24 वर्षीय कमलावती के साथ अंबिकापुर स्थित महुआपारा में रहकर मजदूरी का काम करता है। उसकी पत्नी 9 माह की गर्भवती थी। उसका पहला बच्चा होने वाला था। ललन ने शुक्रवार की सुबह 9 बजे पत्नी को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच में भर्ती कराया था। यहां महिला चिकित्सक उसे नॉर्मल डिलीवरी होने की बात कहकर इंतजार करतीं रहीं।
रात १२ बजे तक जब नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई तो अस्पताल के स्टाफ नर्स ने महिला के पति को बुलाकर बताया कि शनिवार की सुबह ऑपरेशन किया जाएगा। नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो रही है। शनिवार की सुबह 9 बजे ऑपरेशन की सारी प्रक्रिया स्टाफ नर्स द्वारा पूरी कर ली गई।
महिला के पति का परमिशन फार्म पर साइन भी करा लिया गया और उसे बाहर इंतजार करने के लिए बोला गया। इधर दो बजे तक ललन अपने परिजन के साथ बाहर बैठकर इंतजार करता रहा। दो बजे के बाद जब वह अंदर स्टाफ नर्स के पास जाकर पूछा तो उसे बताया गया कि बच्चे की धड़कन बंद हो गई है। इस कारण ऑपरेशन नहीं किया गया। इधर महिला वार्ड में पड़ी रही।
नवजात की मौत की 2 बजे दी गई जानकारी
ललन प्रसाद का कहना है कि मैंने पत्नी को प्रसव के लिए समय पर अस्पताल में लाकर भर्ती करा दिया गया था। अगर समय पर ऑपरेशन हो जाता तो बच्चे की जान बच जाती। हमसे शनिवार की सुबह 9 बजे ऑपरेशन के लिए फार्म पर साइन कराया गया था।
इसके बाद दोपहर दो बजे तक ऑपरेशन नहीं किया गया और मुझे कुछ इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। मैं बाहर बैठकर इंतजार करता रहा। जब मैं परेशान होकर दोपहर दो बजे अंदर जाकर स्टाफ नर्स से पूछा तो उन्होंने बताया कि बच्चे की मौत गर्भ में हो गई है। उसकी धड़कन नहीं मिल रही है।
ऑपरेशन कर शव को निकाला बाहर
नवजात की गर्भ में ही मौत हो जाने के बाद भी उसका शव तत्काल बाहर नहीं निकाला गया। शाम ६ बजे तक महिला गर्भ में मृत बच्चे को लेकर वार्ड में पड़ी रही। जब परिजन ने हंगामा कराना शुरू किया तो सूचना पर शाम ५ बजे विभाग की एचओडी डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव पहुंचीं और बच्चे के शव को ऑपरेशन कर बाहर निकाला।
इसके बाद डॉक्टरों ने सफाई देते हुए बताया कि बच्चे की मौत तो गर्भ में ही 36 घंटे पहले हो गई थी, जबकि महिला के पति के आरोप के अनुसार इस मामले में लापरवाही स्पष्ट नजर आ रही है।
नॉर्मल डिलीवरी का कर रहे थे इंतजार
नॉर्मल डिलीवरी का इंतजार किया जा रहा था। नहीं होने पर ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी। जांच के दौरान बच्चे की धड़कन नहीं मिली। बच्चे के शव को ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया।
अलख वर्मा, उप अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल
डिलीवरी का समय अधिक हो चुका था
शुक्रवार को महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था। उस वक्त ड्यूटी महिला चिकित्सक द्वारा उसकी नॉर्मल डिलीवरी का इंतजार किया गया था। नहीं होने पर ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी। डिलीवरी का समय अधिक हो चुका था।
डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव, एचओडी
36 घंटे पहले हो चुकी थी मौत
नवजात का शव ऑपरेशन कर गर्भ से निकाला गया। नवजात की मौत लगभग ३६ घंटे पहले ही घर में हो चुकी थी। डिलीवरी का डेट 10 से 15 दिन अधिक हो चुका था।
डॉ. वीके श्रीवास्तव, उप अधीक्षक
Published on:
25 May 2019 08:15 pm
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