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बीडीसी व उसकी पत्नी ने राजस्थान विद्युत मंडल को ऐसे लगाए थे 1 करोड़ की चपत, दोनों गए जेल

राजस्थान विद्युत मंडल से प्राप्त किया था एक करोड़ से अधिक का मुआवजा, फर्जीवाड़ा सामने आने पर प्रशासन व पुलिस ने की कार्रवाई

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BDC wife

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अंबिकापुर. बीडीसी व उसकी पत्नी ने शासकीय गोचर भूमि का फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा बनवा लिया था। इसके बाद कई एकड़ जमीन अधीग्रहण कराकर राजस्थान विद्युत मंडल से 1 करोड़ से अधिक रुपए का मुआवजा प्राप्त कर लिया था। इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार की शिकायत पर गुरुवार को उदयपुर के ग्राम हरिहरपुर के बीडीसी व उसकी पत्नी को फर्जीवाड़ा के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के परसा केते क्षेत्र में राजस्थान विद्युत लिमिटेड द्वारा अदानी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कोल उत्खनन का काम किया जा रहा है। कोल उत्खनन के लिए राजस्थान विद्युत लिमिटेड ने परसा केते सहित उदयपुर व आसपास के ग्रामीणों का भूमि अधिग्रहण कर उन्हें मुआवजा भी वितरित किया था।

उदयपुर क्षेत्र के ग्राम साल्ही के हरिहरपुर निवासी जनपद सदस्य बालसाय कोर्राम व उसकी पत्नी साम बाई ने वर्ष 2011-12 में शासकीय गोचर भूमि को कई लोगों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा प्राप्त किया था। आरोपियों ने फर्जी तरीके से पट्टा प्राप्त कर भूमि अधिग्रहण के एवज में छलपूर्वक 1 करोड एक लाख 68 हजार 337 रुपए मुआवजा के रूप में भी प्राप्त कर लिया था।

इसकी शिकायत होने पर तात्कालीन कलक्टर के निर्देश पर उदयपुर एसडीएम आरके तम्बोली ने पूरे मामले की जांच की थी। जांच में मामला साबित होने पर एसडीएम ने रिपोर्ट कलक्टर के समक्ष पेश किया था।

एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार उदयपुर अमरनाथ श्याम ने 24 जून 2017 को उदयपुर थाने में धारा 420, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत जुर्म दर्ज कराया था। फिर आईजी हिमांशु गुप्ता के निर्देशन व एसपी सदानंद कुमार के मार्गदर्शन पर पुलिस विभाग की विशेष अनुसंधान दल ने कार्रवाई की।

स्पेशल टॉस्क फोर्स के एसआई प्रियेश जॉन, प्रधान आरक्षक पन्नालाल, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, विकास सिंह व उदयपुर पुलिस ने मामले में बीडीसी सदस्य बालसाय व उसकी पत्नी साम बाई को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।


ग्रामीण बैंक में जमा थी मुआवजे की राशि
एडिशनल एसपी रामकृष्ण साहू ने बताया कि बालसाय व उसकी पत्नी ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में अलग-अलग खाता खुलवाकर उसमें मुआवजा की राशि जमा कराई थी। दोनों के खाते में आधी-आधी राशि जमा कराई गई थी। कुल 1 करोड़ 1 लाख 68 हजार 337 रुपए खाते में जमा थे। उसके ब्याज की राशि का दुरूपयोग दोनों द्वारा किया जा रहा था।


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