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भाजपा पार्षद ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र, कहा- जूनियरों को बना दिया गया है सीनियरों का बॉस, इस कारण बिगड़ रही व्यवस्था

Newborns death case: भाजपा पार्षद ने लिखा है कि मेडिकल कॉलेज में सीनियर व जूनियर डॉक्टरों के बीच चल रही है वर्चस्व की लड़ाई, अधिकांश एचओडी, स्टाफ नर्स, एमएस व डीन बिलासपुर व रायपुर के, हर शुक्रवार को ही चले जाते हैं घर

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Newborn death case

BJP Councilor letter to health minister

अंबिकापुर. Newborns death case: मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई नवजात बच्चों की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मृत नवजातों के परिजनों ने जहां बिजली गुल होने के बाद बच्चों की मौत का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर मामले में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव (Health Minister TS Singhdeo) को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आमूल-चूल परिवर्तन करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि यहां जूनियरों को सीनियरों का बॉस बनाकर बैठा दिया गया है। सीनियर व जूनियर डॉक्टरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है।


भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने पत्र में उल्लेख किया है कि इस तरह की घटना का मूल कारण दो विभागों की वर्चस्व की लड़ाई है। चिकित्सालय में जितने भी विभाग हैं उनके एचओडी चिकित्सा शिक्षा विभाग के जूनियर डॉक्टर हैं।

उनसे 20-25 साल सीनियर स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों को जो कि जिला चिकित्सालय में पदस्थ हैं, एचओडी का सहायक बनाकर रखा गया है। क्योंकि जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रूप में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा अधिग्रहित किया हुआ है।

ऐसी ही स्थिति सभी वार्डों में प्रभारी जूनियर नर्सें अपने से सीनियर नर्सों की बॉस बनकर बैठी हैं। मेडिकल कॉलेज के अधिकांश एचओडी, स्टाफ नर्स, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट और डीन बिलासपुर व रायपुर के हैं। शुक्रवार को दोपहर में ये सभी अंबिकापुर से बिलासपुर और रायपुर को प्रस्थान कर जाते हैं।

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एमएस व डीन बहाना बनाकर चले जाते हैं घर
भाजपा पार्षद ने पत्र में लिखा है कि मेडिकल सुप्रीटेंडेंट एवं डीन तो रायपुर में मीटिंग का बहाना करके बुधवार या गुरुवार को ही अपने घर बिलासपुर निकल जाते हैं।

इनकी अनुपस्थिति में यह सभी विभाग और वार्डों के जिला चिकित्सालय (District hospital) के पदस्थ सीनियर डॉक्टर और नर्सेस अपने जिम्मेदारी न मानते हुए चुपचाप रहते हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

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