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CG News: सीताबेंगरा गुफा सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक,भगवान नाम ने वनवास में रामगढ़ पहाड़ी पर कुछ समय बिताया था

CG News: रामगढ़ पहाड़ी को रामगिरि भी कहा जाता है। लोक मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था। उत्तरी गुफा को सीताबेंगरा (सीता का कमरा) इसलिए कहा जाता है।

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CG News: सीताबेंगरा गुफा सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक, भगवान नाम ने वनवास में रामगढ़ पहाड़ी पर कुछ समय बिताया था

सीताबेंगरा गुफा (Photo Patrika)

CG News: @ताबीर हुसैन। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित रामगढ़ पहाड़ी की सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं प्राचीन नाट्यशाला के रूप में याद की जाती हैं। इन्हें विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक माना जाता है, जो नाट्यशास्त्र से भी पुरानी हैं। रामगढ़ पहाड़ी को रामगिरि भी कहा जाता है। लोक मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था। उत्तरी गुफा को सीताबेंगरा (सीता का कमरा) इसलिए कहा जाता है।

यह गुफा प्राकृतिक रूप से बनी है, लेकिन इसमें पत्थर काटकर बनाई गई रंगशाला जैसी संरचना है। अर्ध-वृत्ताकार दर्शक सीटिंग, स्टेज एरिया और खुला प्रदर्शन स्थल। पुरातत्वविदों के अनुसार यह तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 300-200 ई.पू.) की है यानी मौर्य काल या उससे पहले की।

एशिया का सबसे पुराना ओपन एयर थिएटर

कुछ विद्वान मानते हैं कि भरत मुनि ने इसी प्रकार की प्राचीन नाट्यशालाओं को देखकर नाट्यशास्त्र की रचना की होगी। सीताबेंगरा को एशिया का सबसे पुराना ओपन-एयर थिएटर माना जाता है। पास ही जोगीमारा गुफा में ब्राह्मी लिपि के अभिलेख मिले हैं, जो प्राचीन कलाकारों, गायकों और नाट्य कला का जिक्र करते हैं। यहां प्राचीन भित्ति चित्र भी हैं, जो भारतीय चित्रकला के सबसे पुराने उदाहरणों में शुमार हैं।

बहुत गहरी हैं भारतीय रंगमंच की जड़ें

2300 वर्ष से अधिक पुरानी यह जगह साबित करती है कि भारतीय रंगमंच की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां नाटक, संगीत और अभिनय की परंपरा यूनानी थिएटर से भी पुरानी मानी जाती है। शोध बताता है कि कालिदास ने मेघदूत कर रचना भी यहीं की है जो साहित्य और नाट्य कला को और समृद्ध करता है।

राजकमल नायक, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त रंग निर्देशक

हमारी नाट्य परंपरा हजारों साल पुरानी

रंग निर्देशक, आचार्य रंजन मोडक़ ने कहा कि रंगमंच दिवस पर रामगढ़ हमें याद दिलाता है कि रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति, शांति और सामाजिक जागृति का माध्यम है। छत्तीसगढ़ की यह अनमोल धरोहर आज के रंगकर्मियों को प्रेरणा देती है कि हमारी नाट्य परंपरा हजारों साल पुरानी है।

कैसे पहुंचे यहां

रामगढ़ पहाड़ी सरगुजा जिले के उत्तरी-पूर्वी भाग में, अम्बिकापुर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पहाड़ी अपनी अनोखी हाथी जैसी आकृति के लिए जानी जाती है, जो इसे आसपास की अन्य पहाड़ियों से अलग करती है। यह विंध्याचल और बघेलखंड की पहाड़ियों का हिस्सा है, और इसकी ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 700 मीटर है। रामगढ़ पहाड़ का मौसम साल भर सुखद रहता है, लेकिन यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक माना जाता है।

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