
दीपक बैज (photo-ANI)
CG Political News: प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अफीम की खेती सरकार के संरक्षण में हो रही है। साथ ही नकली शराब बिक्री और सूखे नशे का कारोबार बढ़ा है। उक्त बातें मंगलवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहीं। वे संगठन सृजन अभियान के तहत पिछले 14 दिनों से सरगुजा संभाग में लगातार प्रवास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत कई स्थानों पर बूथ गठन किया गया है और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को 24 घंटे काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत है। उन्होंने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सरकार भगवान भरोसे चल रही है। प्रदेश में अफीम की खेती सरकार के संरक्षण में हो रही है। अफीम की खेती में बीजेपी के नेता डायरेक्ट रूप से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, डॉ. प्रेस साय सिंह सहित अन्य कांग्रेसी नेता उपस्थित थे।
रसोई गैस को लेकर भी उठाए सवाल
बैज ने रसोई गैस को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री खुद अपनी गाड़ियों में गैस सिलेंडर लेकर चल रहे हैं और रेस्ट हाउस में खाना बनवाकर वापस ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गैस को लेकर आम लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। सदन में प्रधानमंत्री ने खुद बोला है कि आने वाले दिनों में कोरोना जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर कही ये बातें
नक्सलवाद के मुद्दे पर बैज ने कहा कि इसका खत्म होना अच्छी बात है, लेकिन इसके बाद भी बस्तर में चुनौतियां खत्म नहीं होंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार गारंटी दे सकती है कि 31 मार्च के बाद किसी आदिवासी को नक्सली बताकर परेशान नहीं किया जाएगा और जल-जंगल-जमीन को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा।
‘हिरणों की मौत, बीमार सिस्टम का परिणाम’
अंबिकापुर के संजय पार्क में हिरणों की मौत के मामले को लेकर भी बैज ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह सामान्य घटना नहीं, बल्कि बीमार सिस्टम का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेस्क्यू सेंटर के नाम पर जानवरों को पार्क में रखा गया, जिससे उनकी सुरक्षा प्रभावित हुई। इस मामले में सिर्फ निचले स्तर पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई है, जबकि बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
Updated on:
25 Mar 2026 06:56 pm
Published on:
25 Mar 2026 06:56 pm
