
Farmacist and his suicide note
अंबिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फार्मासिस्ट के पद पर पदस्थ एक युवक ने अपने घर के बरामदे में पत्नी के दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या (Commits suicide) कर ली। आत्महत्या से पहले उसने सुसाइड नोट भी छोड़ा था। सुसाइड नोट में उसने मौत का जिम्मेदार खुद को बताया है।
उसने लिखा है कि वह अब जीना नहीं चाहता है, मरना चाहता है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को उतरवाया और पीएम पश्चात परिजन को सौंप दिया। युवक की मौत से उसकी पत्नी-बेटे व अन्य परिजन सदमे में हैं।
दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम कुनकुरी निवासी राजेंद्र राजवाड़े पिता ईश्वर राजवाड़े 41 वर्ष मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में फार्मासिस्ट था। उसने शहर के नमनाकला स्थित वसुंधरा सन सिटी में एक घर भी ले रखा था।
यहां वह अपनी पत्नी व 10 वर्षीय बेटे के साथ रहता था। बुधवार की दोपहर वह ड्यूटी से लौटा और पत्नी व बेटे के साथ अपने गांव दरिमा पितृपक्ष कार्यक्रम में गया था। वहां से शाम करीब 6 बजे सभी को लेकर लौटा और रात करीब 10 बजे वह लैपटॉप में अपने बेटे के साथ बैठकर कुछ फोटोग्राफ्स देख रहा था।
फिर पत्नी व बेटा सोने लगे। इसी बीच वह अचानक कमरे से बाहर बरामदे में निकला और पत्नी के दुपट्टे का फंदा बनाकर फांसी (Commits suicide) लगा ली।
पत्नी बाहर निकली तो लटकते देखा शव
रात करीब 12 बजे पत्नी कमरे से बाहर निकली तो बरामदे में पति का शव फांसी के फंदे से लटकते देखा। सूचना पर गांधीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरु की। गुरुवार की सुबह पुलिस ने शव को फंदे से उतरवाकर पीएम पश्चात परिजन को सौंप दिया। युवक की मौत से पत्नी व बेटा सदमे में हैं।
पुलिस ने बरामद किया सुसाइड नोट
पुलिस ने जब मौके का मुआयना किया तो वहां फार्मासिस्ट द्वारा एक पन्ने में लिखा सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में उसने लिखा कि वह घर छोडक़र जा रहा है।
वह यह बात पूरे होशो-हवाश में लिख रहा है। उसकी जीने की इच्छा नहीं है इसलिए वह मरना चाहता है। वह अपनी मौत का जिम्मेदार स्वयं है।
Published on:
17 Sept 2020 03:50 pm
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