
Bear dead body found in forest pit
उदयपुर. सप्ताहभर पूर्व जंगल में मवेशी चराने गए ग्रामीण पर मादा भालू ने अचानक हमला कर दिया। यह देख वहां मवेशी चरा रहे उसके साथी ने पीछे से मादा भालू को पकड़ लिया, इससे पहले वाला ग्रामीण भालू की जकड़ से छूट गया। फिर उसने टांगी से ताबड़तोड़ वार कर मादा भालू को मौत के घाट उतार दिया।
भालू का शव दोनों ढोकर लाए और जंगल में ही एक गड्ढे में फेंक दिया। गांव में इस बात की खबर फैल गई थी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने भालू का शव खोज निकाला और दोनों ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया।
सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम ललाती के मोहर घुटरा जंगल में 20 अगस्त को मवेशी चरा रहे ललाती निवासी घुरन पर मादा भालू ने हमला कर दिया था।
पास में मवेशी चरा रहे करौंदी खुटरापारा निवासी कुन्नू राम बीच-बचाव करने पहुंचा और भालू को पीछे की ओर से दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया, जिससे घूरन राम भालू की पकड़ से छूट गया। लेकिन भालू ने कुन्नू राम के हाथ को बुरी तरह से जख्मी कर दिया।
तब घुरन राम ने टांगी से कई बार प्रहार किया, इससे भालू की मौके पर ही मौत हो गयी। घूरन एवं कुन्नू जख्मी होते हुए भी अपना इलाज कराने या वन अमला को सूचना दिए बगैर मृत भालू को ढोकर 20 अगस्त की रात को ही प्रेमनगर वन परिक्षेत्र के ग्राम सरस्वतीपुर के कोसम झरिया जंगल मे गड्ढे में डाल आए।
फिर 24 अगस्त को सूत्रों के माध्यम से वन अमले को ग्रामीणों द्वारा भालू को मारे जाने की सूचना मिलने पर संदेह के आधार पर कुन्नू और घुरन को पूछताछ के लिए वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया। यहां दोनों ने भालू को मारने का जुर्म कबूल लिया।
25 लोगों की टीम ने खोज निकाला भालू का शव
25 अगस्त को वन अमला सहित अन्य 25 लोगों ने घंटों की मशक्कत के बाद भालू का शव खोज निकाला। जंगल के बीच पत्थर के लिए खोदे गए गड्ढे में मादा भालू का शव मिला जिस पर कीड़े लगने लगे थे।
मौके पर ही शव का पीएम कराया गया। मामले में 27 अगस्त को दोनों आरोपियों को वन अधिनियम की धारा 9 एवं 39 वन्य प्राणियों के अवैध शिकार के तहत न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
कार्रवाई में ये रहे शामिल
कार्रवाई में रेंजर सपना मुखर्जी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षु रेंजर ललित साय, डिप्टी रेंजर अरुण प्रसाद सिंह, परिक्षेत्र सहायक श्याम बिहारी सोनी, वन रक्षक गिरीश बहादुर सिंह, शशिकांत सिंह, धनेश्वर सिंह, विष्णु सिंह, ऋषि रवि, अवधेश पुरी, अमरनाथ राजवाड़े, राजेश राजवाड़े, बुधसाय, दिनेश तिवारी, बिंदेश्वर, नंद कुमार, भरत सिंह, आरमो सिंह सक्रिय रहे।
वन अपराधियों के लिये लॉकअप की व्यवस्था नहीं
संदेह के आधार पर वन अपराधियों को हिरासत में रखने के लिए किसी भी प्रकार की व्यवस्था वन परिक्षेत्र में नहीं होने से दोनों ही आरोपियों को पुलिस थाने भी ले जाया गया।
लेकिन थाना प्रभारी द्वारा नियमों का हवाला देकर थाने में रखने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद वन कर्मियों ने व्यवस्था बनाकर रामगढ़ में स्थित भवन में दोनों ही आरोपियों को रखा।
Published on:
28 Aug 2021 07:35 pm
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