
Fishries by women in Surguja
अंबिकापुर. जिला प्रशासन द्वारा महिला स्व सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण व संसाधन देने के अलावा आवश्यक ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी का परिणाम है कि आज इनसे जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से सबल बन रही हैं और लाखों नहीं बल्कि 1 करोड़ से अधिक रुपए इन्वेस्ट कर स्वरोजगार को बढ़ावा देने में लगी हुई है। सरगुजा जिले की महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़कर तकरीबन सवा करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर मछली पालन कर रही हैं।
सरगुजा जिले की महिलाएं अब मछली पालन कर आत्मनिर्भर बनेंगी और स्वरोजगार से जुड़ेंगी। इसके लिए कवायद भी शुरू कर दी गई है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार से जोडऩे जिला प्रशासन की यह महत्वपूर्ण योजना बताई जा रही है। मछली पालन के लिए जिले के 2000 छोटे-बड़े तालाबों को चिह्नांकित कर मछली पालन किया जा रहा है। इसमें 1 हजार 490 महिलाएं समूह से जुड़कर जबकि 345 महिलाएं व्यक्तिगत रूप से मछली पालन कर रही हैं।
इसके लिए अलग.अलग समूह की महिलाओं ने कुल 124 लाख का इन्वेस्ट कर मछली बीज तालाबों में डाला है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो करीब 14 से 15 करोड़ की आय का अनुमान है।
बंपर कमाई के आसार
मछली पालन के लिए अलग-अलग समूह द्वारा जून और जुलाई महीने के बीच मछली पालन के लिए बीज डाला गया है। मार्च से अप्रैल 2022 के बीच ये मछलियां लगभग एक से सवा किलोग्राम की हो जाएंगीं। बाजार में इसकी कीमत 150 प्रति किलो है। इस तरह से लगभग 15 करोड़ रुपए की बंपर कमाई के आसार हैं।
बंगाल से मंगा कर डाले हैं बीज
सरगुजा में वर्षों से मछली पालन हो रहा है, लेकिन इस बार समूह की महिलाएं इसे विशेष तौर से कर रही हैं। सरगुजा फिशरी डिपार्टमेंट किसानों को 15 अगस्त से 30 सितंबर के बीच बीज उपलब्ध करा पाता था।
इस कारण मछलियों का समुचित ग्रोथ नहीं हो पाता था। इससे पूर्व यहां का वातावरण अनुकूल नहीं होने के कारण जून-जुलाई में मछली बीज तैयार कर देना संभव नहीं था। ऐसे में दो समूह द्वारा कोलकाता से लगभग 5 लाख रुपए का बीज खरीद कर यहां लाया गया और पालन किया जा रहा है।
1 हजार मछली बीज तैयार करने में 40 से 45 हजार खर्च
बताया जा रहा है कि 30 बाई 40 स्क्वायर फीट के डबरी में 1000 बीज डाला जाता है। इसमें 20 प्रतिशत बीज खराब हो जाते हैं। शेष 800 मछली बीज 1 वर्ष में न्यूनतम 1 किलो वजन का हो जाता है। इस तरह 1 साल में किसानों को लगभग सवा से डेढ़ लाख रुपए का प्रॉफिट होता है।
अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
कलक्टर संजीव कुमार झा इस प्रोजेक्ट को अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि मछली पालन के लिए किसानों को केसीसी से ऋण भी दिया गया है। अब तक किसानों को केवल धान व गेहूं के लिए ही केसीसी दिया जाता था।
उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 2000 तालाब में मछली पालन किया जा रहा है, इसमें कई तरह की मछलियां हैं। इसमें किसानों ने लगभग सवा करोड़ रुपए का इन्वेस्ट किया है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो अगले वर्ष तालाबों की संख्या में 2 हजार और की बढ़ाई जाएगी।
Published on:
15 Sept 2021 10:06 pm
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