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गृहमंत्री ने पत्थरगढ़ी को बताया संविधान विरोधी, कहा- आंदोलन राजनीति से प्रेरित, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया अनुरूप

सर्व आदिवासी समाज द्वारा पत्थरगढ़ी को लेकर सम्मेलन का आयोजन, इधर गृहमंत्री ने अजा प्रकोष्ठ के साथ की पत्रकारों से चर्चा

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Home minister press conference

Home Minister press conference

अंबिकापुर. सर्व आदिवासी समाज द्वारा रविवार को राजमोहिनी भवन में २१ सूत्रीय मांगों को लेकर सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सरगुजा संभाग के सभी जिले के विभिन्न आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम थे।

उन्होंने जशपुर जिले में चल रहे पत्थरगढ़ी आंदोलन को संविधान में मिले प्रावधानों के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे मंत्री या विधायक कोई भी संविधान व पेशा कानून की जानकारी नहीं रखता है। अगर सरकार आदिवासी समाज के हित में कार्य करती तो सामाजिक आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ती।

इधर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पत्थरगढ़ी संविधान विरोधी है। पत्थरगढ़ी आंदोलन पूरी तरह से सरगुजा संभाग की समरसता के माहौल को बिगाडऩे का षडयंत्र है। यह भोले-भाले आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराने की तैयारी है। चुनाव के पूर्व इस तरह का आंदोलन पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। इसमें शामिल नेताओं की पहचान की जा रही है और कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।

सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि पत्थरगढ़ी कानून आदिवासी समाज की पूर्व परम्परा के तहत वर्षों से चली आ रही एक व्यवस्था है। गांव के बाहर आदिवासी समाज एक पत्थर लगाता है। अगर उसी व्यवस्था के तहत आज पत्थर गाड़ दिया जाता है तो इसमें क्या गलत है।

उन्होंने कहा कि संविधान में पांचवीं अनुसूची के तहत जो व्यवस्था दी गई है, उसमें वहां के ग्रामसभा को काफी अधिकार दिए गए हैं। उसके तहत ही पत्थरगढ़ी आंदोलन किया जा रहा है। सरकार में बैठे लोग इसे गलत बता रहे हैं तो आदिवासी समाज के लोग भोले-भाले हैं। वे ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है। सरकार के नुमाइंदों को चाहिए था कि वे ग्रामीणों के बीच जाकर उनसे चर्चा करते और उन्हें समझाते कि यह गलत है लेकिन कोई नहीं गया।

सीधे सद्भावना पदयात्रा शुरू कर क्षेत्र में टकराहट की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर कोई समाज दिशा से भटक गया है तो उसे समझाने का प्रयास सरकार को करनी चाहिए। पांचवीं अनुसूची व पेशा कानून आदिवासी क्षेत्रों में लागू किया जाना चाहिए। अगर सरकार को आदिवासियों की इतनी चिंता होती तो वह उनके हित के लिए काम करती और समाज को आज सामाजिक आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती।

संविधान के दायरे में रहकर पूरा आंदोलन किया जा रहा है। इसकी वजह से इसे पूरा समर्थन है। जिस दिन संविधान व कानून की लक्ष्मण रेखा पार करेंगे, आदिवासी समाज समर्थन देना बंद कर देगी। इस दौरान प्रांताध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस बीएस नेताम, एनएस मण्डावी, मोतीलाल पैकरा, देवनारायण यादव, निशिकांत भगत सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

आरएसएस नहीं मानती देश के संविधान को
अरविंद नेताम ने कहा कि भाजपा में बैठे सभी मंत्री व विधायक व प्रधानमंत्री सभी संविधान की शपथ लेते हैं। लेकिन भाजपा को जो संचालित करने वाले आरएसएस के लोग डॉ. भीमराव द्वारा बनाए गए संविधान को नहीं मानते। किसकी बात सुनें यहां सभी अपनी अलग-अलग राग अलापते हैं और ज्यादा कुछ हुआ तो इनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जुमला बता देते हैं।


कांग्रेस को करनी चाहिए स्थिति स्पष्ट
अरविंद नेताम ने कहा कि कांग्रेस पूरे पत्थरगढ़ी आंदोलन पर चुप है। ऐसा नहीं चलेगा। आप दोनों नाव पर पांव रखकर नहीं चल सकते। कांग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि वे आदिवासियों के साथ हैं या फिर सरकार के साथ। अब आदिवासियों के आंदोलन को किसी राजनीतिक दल का चुनाव के समय मुद्दा नहीं बनने दिया जाएगा।

आजादी के बाद से सर्व आदिवासी समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है। हर कोई अपने हित व स्वार्थ के लिए आदिवासी समाज का उपयोग करता है लेकिन जो चुनाव के पूर्व हमारी मांगों को मानेगा, समाज के लोग उसके साथ खड़े होंगे। सरकार की भावना सिर्फ आदिवासी समाज की जमीन लूटने की है। वह आदिवासी समाज के लोगों को उनके जमीन से ही बेदखल करना चाहती है। हमारा औद्योगिक घराने से कोई विरोध नहीं है, हमारा सरकार से विरोध है।


जब अंग्रेजों से लड़ा तो सरकार से लडऩा कौन सी बड़ी बात
अरविंद नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज जब अंग्रेजों से लड़ाई लड़ सकती है तो यह हमारे द्वारा चुनी हुई सरकार है। इससे लडऩा कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने हक के लिए अब न्यायालय की शरण में नहीं जाएगी। यह लड़ाई सामाजिक स्तर पर लड़ी जाएगी।


समझदारों को नहीं देते टिकट
भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दल आदिवासी समाज के समझदारों को टिकट नहीं देती है। अगर समझदार लोग चुनाव लड़ते तो आज आदिवासी मुख्यमंत्री होता। सरगुजा संभाग में आदिवासी समाज के ७ विधायक होने के बावजूद यहां समाज के लोगों के लिए कोई बड़ा काम नहीं किया गया है। यह सबसे बड़ी विडंबना है।

गृहमंत्री ने बताया संविधान विरोधी है पत्थरगढ़ी
सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सरगुजा संभाग की सामाजिक समरसता बिगाडऩे का प्रयास किया जा रहा है, जिसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में आदिवासी समाज का पिछले १५ वर्षों में काफी विकास किया गया है।

पहले जहां सड़क नहीं थी, वहां आज घर-घर तक पहुंच गई है। गृहमंत्री ने कहा कि भाजपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक कर इस पत्थरगढ़ी आंदोलन की निंदा की गई है। अनुसूचित जाति के लोग एकजुट होकर सरगुजा की समरसता बनाए रखने का प्रयास करेंगे। इसका मिलकर घोर विरोध करेंगे। संविधान में उपलब्ध प्रावधानों के विपरीत जाकर आंदोलन किया जा रहा है।

पत्थरगढ़ी आंदोलन एक राजनीतिक षडयंत्र है। जो एक आदिवासी समाज के भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ रिटायर्ड अधिकारी जो शहर के बड़े-बड़े महलों में बैठे हैं उनके द्वारा इस आंदोलन का नेतृत्व किया जा रहा है। अगर उन्हें आदिवासियों की इतनी ही चिंता थी तो जब वे अधिकारी थे तब इनके हित की बात क्यों नहीं की। आज अपने आपको एक अलग ही समाज से बता रहे हैं।

जबकि पूरे सेवा के दौरान अपने आपको हिन्दू बताने से नहीं कतराए। भाजपा के प्रति लोगों का विश्वास पहले की तरह आज भी बना हुआ है। इससे घबराकर इसे राजनीतिक स्वरूप दिया जा रहा है। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए पीछे से इसका समर्थन कर रहे हैं। इस दौरान सासंद कमलभान सिंह, प्रबोध मिंज, जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह, अरूणा सिंह, मंजूषा भगत, विजय भान सिंह, प्रभात खलखो सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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