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आधी रात को टॉर्च जलाते ही पति ने बेड पर देखी ऐसी चीज कि सुबह पत्नी की हो गई मौत

पत्नी व 3 साल के बेटे के साथ सोया था युवक, रात में हड़बड़ी में कुछ समझ में नहीं आया तो चुना था ये रास्ता

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Dead body

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अंबिकापुर. 26 वर्षीय एक महिला शनिवार की रात अपने पति व मासूम बेटे के साथ जमीन पर सोयी थी। आधी रात को उसके हाथ में कुछ काटने का एहसास हुआ तो उठ गई। उसने पति को ये बात बताई। हड़बड़ाए पति ने टॉर्च जलाकर देखा तो पत्नी की ओर बिस्तर पर करैत सांप पड़ा था। फिर उसे यह समझते थोड़ी भी देर नहीं लगी तो पत्नी को सांप ने डस लिया है।

आनन-फानन में वह पत्नी को दूसरी जगह झाडफ़ूंक कराने ले गया। यहां तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो रविवार की सुबह गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां इलाज शुरु होते ही उसकी मौत हो गई।


जशपुर जिले के पंडरापाठ निवासी २६ वर्षीय सीमा पति मालू राम पहाड़ी कोरवा शनिवार की रात अपने घर में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोई थी। साथ में पति व ३ वर्ष का बेटा भी सोया था। रात करीब ढाई बजे महिला के दाहिने हाथ में कुछ काटने का एहसास हुआ तो वह उठ गई। उसने पति को जगाया और इसकी जानकारी दी।

फिर पति ने टॉर्च जलाकर देखा तो जिस तरफ पत्नी सो रही थी वहां बिस्तर के पास में करैत सांप लेटा हुआ था। उसने पत्नी के हाथ पर देखा तो सांप डसने के निशान बने हुए थे। इसके बाद आनन-फानन में वह पत्नी का झाडफ़ूंक कराने जशपुर जिले के ही ग्राम बगीचा ले गया।

काफी देर तक झाडफ़ूंक कराने के कारण महिला की तबीयत सुधरने की बजाय और बिगड़ती चली गई। फिर उसे इलाज के लिए बगीचा स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। यहां महिला की गंभीर हालत को देख डॉक्टरों ने उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। इतना होते तक सुबह हो गई थी।

इसके बाद पति रविवार की सुबह 8 बजे उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने इलाज शुरु ही किया था कि उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पंचनाम व पीएम पश्चात शव उसे सौंप दिया।


जमीन पर सोते डस रहे सांप
सर्पदंश की अधिकांश घटनाएं ग्रामीण क्षेत्र में जमीन पर सोने के दौरान हो रही हैं। सर्पदंश के बाद परिजन पीडि़त को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाते है और उपचार के अभाव में उनकी मौत हो जाती है।

ग्रामीण क्षेत्र के लोग हड़बड़ी में या जागरुकता के अभाव में झाडफ़ूंक का सहारा लेते हैं, जब बात अधिक बिगड़ जाती है तो वे अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों के लिए भी पीडि़त को बचाना मुश्किल हो जाता है।

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