
Doctors bicycle rally
अंबिकापुर. केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में आईएमए के राष्ट्रीय आह्वान पर रविवार को डाक्टरों ने रैली निकाल विरोध जताया। रैली मेडिकल कॉलेज अस्पताल से शुरु होकर घड़ी चौक पर सम्पन्न हुई। रैली में वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ एमबीबीएस के विद्यार्थी भी शामिल हुए। बिल का विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह बिल पास हुआ तो मेडिकल के इतिहास में काला दिन होगा। इसकी वजह से इलाज महंगा होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय आईएम के आह्वान पर रविवार को जिलेभर के प्राइवेट डॉक्टरों ने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में साइकिल यात्रा निकालकर लोगों को बिल की खामियां बताईं। सुबह 11 बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल से डॉक्टरों ने साइकिल यात्रा के साथ पदयात्रा निकाल विरोध जताया और लोगों को कमीशन की खामियों के संबंध में बताया।
रैली अस्पताल से निकलकर जयस्तंभ चौक होते हुए महामाया चौक, देवीगंज रोड होते हुए घड़ी चौक पहुंचकर खत्म हुई। इस दौरान आईएमए के अध्यक्ष डॉ. डीडी अग्रवाल ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई के बाद विद्यार्थियों को एग्जिट टेस्ट पास करना पड़ेगा। इसके चलते विद्यार्थियों में तनाव बढ़ेगा। इसके लिए ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को बस एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा।
इसी परीक्षा के आधार पर पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दाखिला होगा। जबकि इसके लिए कम से कम एमबीबीएस क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इससे नीम-हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।
इस दौरान आईएमए के सचिव डॉ अनुपम मिंज, डॉ. एके जायसवाल, डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, डॉ. जेके रेलवानी, डॉ. व्हीके श्रीवास्तव, डॉ. संजय गोयल, डॉ.फैजुल हसन फिरदौसी, डॉ. राजेन्द्र परीडा, डॉ अभिजीत जैन, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. आशा बंसल, डॉ. सरिता सिंह सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।
क्या है एनएमसी बिल
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस बिल को लोकसभा में रखा गया था। फिलहाल कुछ बदलावों के लिए इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी में भेज दिया गया है। नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के तहत चार स्वायत्त बोर्ड बनाने का प्रावधान है। इनका काम अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा को देखने के अलावा चिकित्सा संस्थानों की मान्यता और डॉक्टरों के पंजीकरण की व्यवस्था को देखना होगा।
नेशनल मेडिकल कमीशन में सरकार द्वारा नामित चेयरमैन और सदस्य होंगे जबकि बोर्ड में सदस्य सर्च कमेटी के जरिये तलाश किए जाएंगे। यह कैबिनेट सचिव की निगरानी में बनाई जाएगी। पैनल में 12 पूर्व और 5 चयनित सदस्य होंगे।
डॉक्टर इसलिए कर रहे विरोध
डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह बिल पास हुआ तो मेडिकल के इतिहास में काला दिन होगा। इसकी वजह से इलाज महंगा होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इस बिल के लागू होने से निजी मेडिकल कॉलेजों पर सरकार का शिकंजा मजबूत होगा।
निजी कॉलेज हो जाएंगे ज्यादा मजबूत
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पास होता है तो पहले प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसदी सीटों की फीस मैनेजमेंट तय करती थी, लेकिन अब नए बिल के मुताबिक मैनेजमेंट 60 फीसदी सीटों की फीस तय कर पाएगा। इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन, होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी पद्धति की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रप्रोजल है। इसे करने के बाद वे मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे।
Published on:
11 Mar 2018 07:22 pm

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