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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: 14 साल की उम्र में सुप्रिया के सिर से उठा मां-बाप का साया, भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाते पाया ये मुकाम

International Women's Day: माता-पिता की मौत (Parents died) के बाद भाई-बहन की जिम्मेदारी आने के बावजूद नहीं डिगे सुप्रिया (Supriya) के कदम, 19 साल की उम्र में है चाइल्ड लाइन (Childline) टीम की मेंबर

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: 14 साल की उम्र में सुप्रिया के सिर से उठा मां-बाप का साया, भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाते पाया ये मुकाम

Supriya Singh with Meera Shukla

अंबिकापुर. कहते हैं कि बेटियां मां-बाप के दर्द को सबसे ज्यादा समझती हैं। उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों का कम उम्र में ही एहसास हो जाता है। भावुक, कोमल और कमजोर समझी जाने वाली लड़कियां आज शक्ति, साहस और सफलता का पर्याय बनकर मां-बाप के हर सपने को सच कर रही हैं।

चाइल्ड लाइन अंबिकापुर (Childline Ambikapur) में टीम मेंबर के रूप में काम कर रही जिले के मैनपाट निवासी 19 वर्षीय सुप्रिया सिंह (Supriya Singh) भी ऐसी ही होनहार बेटी है।


चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी सुप्रिया के सिर से 14 वर्ष के उम्र में ही माता-पिता का साया उठ चुका था। मां की मौत कैंसर से जंग लड़ते हुए हो गई थी। इसके तीन महीने बाद पिता की भी मौत हो गई थी। इसके बाद भाई-बहन की जिम्मेदारी सुप्रिया पर आ गई। इस स्थिति में अन्य परिजनों ने सुप्रिया को साथ देने से मना कर दिया।

लोगों ने दो वक्त की रोटी देने से मना कर दिया। बाल्यावस्था में अगर सिर से माता-पिता का साया उठ जाए तो काफी दुखद होता है। इस स्थिति में बच्चे अनाथ का जीवन जीते हैं और शहर के किसी चौक चौराहों पर पेट भरने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाते नजर आते हैं।

जो जिन्दगी का काफी दुखद पल होता है। लेकिन सुप्रिया ने इन सारी परिस्थितियों का सामना करने हुए मिसाल पेश की है। वह अपने भाई बहन को लेकर अंबिकापुर चाइल्ड लाइन में रही। (International Women's Day)

चाइल्ड लाइन में रहकर सुप्रिया 12वीं तक की पढ़ाई पूर्ण कर चुकी है आगे की पढ़ाई भी कर रही है। 18 वर्ष की उम्र पार करने के बाद वह चाइल्ड लाइन में टीम मेंबर के रूप में बेहतर काम कर रही है।


पिता की मौत के बाद कंधा देने वाला नहीं था कोई
सुप्रिया ने अपनी दुख भरी जिन्दगी के बारे में सबसे भावुक पल को याद करते हुए बताया कि मेरी मां की मौत कैंसर से वर्ष 2017 में हो गई थी। इसके तीन महीने बाद पिता की भी मौत हो गई।

मां की मौत के बाद पिता ने हम सब को संभाला था। जब पिता की मौत हो गई थी शव को कंधा देने वाला भी कोई नहीं था। परिवार वाले सभी छोड़कर भाग गए। इस स्थिति में गांव के सरपंच ने साथ दिया और शव का अंतिम संस्कार कराया था।


आईपीएस की तैयारी में जुटी
14 वर्ष की उम्र में माता-पिता की मौत के बाद सुप्रिया अपने छोटे भाई बहन के साथ आगे बढ़ रही है। भाई बहन भी चाइल्ड लाइन में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। काफी संघर्ष के बाद भी सुप्रिया 12वीं की पढ़ाई कर आगे की पढ़ाई कर रही है। सुप्रिया का सपना आईपीएस बनना है। वह हिम्मत व जज्बे के साथ सारी परेशानियों को दरकिनार कर पढ़ाई कर रही है और आईपीएस की तैयारी में जुटी है।


दूसरी मां के रूप में मिलीं मीरा मां
सुप्रिया का मानना है कि जन्म देने वाली मां छोड़कर चली गई पर संघर्ष भरी जिन्दगी में रास्ता दिखाने वाली दूसरी मां के रूप में मीरा शुक्ला मिलीं, जिन्होंने बहुत ही सहयोग किया है। इन्होंने मार्ग दिखाने का काम किया है। जब मैं चाइल्ड लाइन आई थी तो दो दिनों तक रो रही थी।

इन्होंने ही मुझे हिम्मत बंधाई। वहीं परिवार परामर्श केन्द्र की संचालिका मीरा शुक्ला ने बताया कि सुप्रिया काफी हिम्मत वाली लड़की है। वह अपने भाई बहनों के लिए मिसाल बनी हुई है। आज चारों भाई बहन चाइल्ड लाइन में हैं।


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