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बिना हैंडपंप और ट्यूबवेल के यहां सालभर निकलता है पानी, मिनरल वाटर जैसी है मिठास, नाम है पाताल तोड़

Patal Tod: छत्तीसगढ़ के शिमला (Chhattisgarh's Shimla) में एक ऐसा स्थान है जहां से गर्मी, ठंड व बारिश के दिनों में भी निरंतर निकलता रहता है पानी, बोतलबंद पानी (Packed bottle water) से कम नहीं है इसकी शुद्धता

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Pataltod well in Mainpat

Pataltod in Mainpat

अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ में आज भी कई इलाके ऐसे हैं जहां पानी के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ती है। गर्मी के दिनों में तो हालत और भी खराब हो जाती हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से विख्यात मैनपाट में एक ऐसी जगह है जहां बिना हैंडपंप और ट्यूबवेल के सालभर एक ही धार में पानी निकलता है।

यहां से निकलने वाले पानी की मिठास (Sweetness) किसी बोतलबंद पानी से कम नहीं है। यही कारण है कि मैनपाट आने वाला हर पर्यटक यहां आकर पानी का स्वाद जरूर लेता है।


हम बात कर रहे हैं मैनपाट के रोपाखार स्थित पाताल तोड़ कुआं (PatalTod well) की। गर्मी में अच्छे-अच्छे जलस्रोत सूख जाते हैं लेकिन पाताल तोड़ कुआं की खासियत यह है कि यहां किसी भी मौसम में जमीन के भीतर से एक मोटी धार में पानी आता है। पाताल तोड़ कुएं की इस खासियत के कारण पर्यटन की दृष्टि से इसे संरक्षित व विकसित किया जा रहा है।

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ऐसे पड़ा इसका नाम
मैनपाट (Mainpat) के रोपाखार पंचायत में वर्ष 1965 में तिब्बतियों ने ढोढ़ीनुमा एक प्राकृतिक जल स्रोत की पहचान की थी। चूंकि पाताल से यहां निरंतर पानी आ रहा है।

IMAGE CREDIT: Pataltod in Mainpat

इस कारण इसे वर्ष 1991 में एक स्ट्रक्चर प्रदान कर इसका नाम पातालतोड़ कुआं रखा गया। इस जल स्रोत को लोग देवी धाम जल स्रोत भी मानते हैं, क्योंकि ये अरसे से पूरे 12 महीने में एक ही धार में निरंतर प्रवाहित हो रहा है।


विज्ञान के जानकारों का ये है कहना
वनस्पति विज्ञान शास्त्री ने बताया कि गुरूत्वाकर्षण शक्ति (Gravitational force) के कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं। यहां पानी गुरूत्वाकर्षण के विपरीत प्रभाव के कारण ऊपर की ओर निरंतर प्रवाहित हो रहा है। पानी के चट्टान व बालू की वजह से छनकर आने से पूरी तरह से शुद्ध है।

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ये भी एक वजह
भूगोल के अनुसार इसे प्रवाहित जल कहा जाता है, जो 24 घंटे निरंतर बहता रहता है। यह जल का वह भाग है जो पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ज़मीन के क्षेत्रों से होता हुआ अंत में नीचे जाकर ठोस चट्टानों के ऊपर इक_ा हो जाता है।

पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण की शक्ति के प्रभाव के कारण वर्षा का पानी नीचे उतरते-उतरते अपारगम्य चट्टानों तक पहुंच जाता है। धीरे-धीरे चट्टान के ऊपर की मिट्टी की परतें पूरी तरह संतृप्त हो जाती हैं। इस प्रकार का एकत्र पानी भौम जल परिक्षेत्र की रचना करता है।

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