
Dr. Amit Asati, Dr. JK Singh, Dr. Raushan Verma and Dr. Shailendra Gupta
अंबिकापुर. कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) बेहद ही जरूरी नहीं है। यह केवल उन मरीजों के लिए लाभदायक है, जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेबल 90 या इससे कम होता है। रेमडेसिविर केवल वायरस के संक्रमण को कम कर सकता है, संक्रमण के बाद हुई क्षति को दूर करने में इसका कोई योगदान नहीं होता है।
बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन के बिना भी मरीज की जान बचाई जा सकती है। ये बातें अंबिकापुर के वरिष्ठ तथा आइएमए के सदस्य डॉक्टरों (IMA Doctor's) ने संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।
डॉक्टरों ने कोविड संक्रमण से प्रभावित मरीजों में रेमडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ती मांग को अनुचित बताते हुए कोरोना के इलाज के लिए अति आवश्यक होने के दावे को नकारा है। उन्होंने कहा है कि कोविड संक्रमण के प्रभावी रोकथाम के लिए दवाइयों के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया, फेफड़े में संक्रमण से हुए क्षति की मात्रा व शरीर के विभिन्न अंगो की क्रियाशीलता पर निर्भर करती है।
नगर के लाइफलाइन हॉस्पिटल के सीनियर डॉ अमित असाटी ने बताया कि उनके संस्थान में लगभग 230 कोविड मरीज भर्ती हुए हैं जिनमें से ज्यादातर गम्भीर लक्षण वाले थे।
इनमें से 200 से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जिनमे रेमडेसिविर इंजेक्शन का प्रयोग नही किया गया, जबकि यह देखा गया कि जिनकी मृत्यु हुई उनमें रेमडेसिविर का प्रयोग किया गया था। यह कहना बिल्कुल गलत है कि रेमडेसिविर से कोविड पेशेंट की जान बच सकती है।
रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के बाद भी नहीं बची जान
जीवन ज्योति हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेके सिंह ने बताया कि उनके अस्पताल में 500 से अधिक गंभीर प्रकृति के कोविड मरीजों का इलाज किया गया। इनमें लगभग 5 से 7 मरीजों की मृत्यु हुई। इनमें रेमडेसिविर के प्रयोग के बावजूद मरीज को बचाया नही जा सका। कोविड इंफेक्शन को रोकने के लिए रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है जो जरूरी नही कि हर व्यक्ति में काम करे।
शुरु के 7 दिन के भीतर इंजेक्शन लगना उचित
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के छाती तथा श्वसन तंत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रोशन लाल वर्मा तथा कोविड हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी अधिकारी ने बताया कि रेमडेसिविर का इंजेक्शन शुरु के 7 दिन के भीतर लगना उचित रहता है।
यह ऐसे मरीज में लाभदायक होता है जिनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 से कम होता है। हम लोगों ने सफलतापूर्वक बहुत से गंभीर लक्षण वाले कोविड मरीजों को बचाया है जिनको रेमडेसिविर का इंजेक्शन नही लगा है।
बिना रेमडेसिविर 8 हजार से ज्यादा मरीज हो चुके हैं स्वस्थ
इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के सदस्य डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने कोविड पेशेंट को रेमडेसिविर की अति आवश्यकता का खंडन किया। उन्होंने कहा कि जितने भी उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान जैसे आईसीएमआर, डब्लूएचओ आदि में से किसी ने भी रेमडेसिविर इंजेक्शन को कोविड संक्रमण के लिए एकमात्र दवाई निरूपित नही किया है। ये सही है कि रेमडेसिविर का उपयोग कोविड से संक्रमित मरीजों के उपचार में किया जाता है।
अन्य दवाइयों के साथ-साथ जिन व्यक्तियों को रेमडेसिविर का इंजेक्शन लगता है वह व्यक्ति स्वस्थ होता है। लेकिन यह कहना पूरी तरह से गलत है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन लगने के बाद मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) के उपयोग के पूरे सरगुजा में 8 हजार से अधिक मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।
Published on:
28 Apr 2021 07:11 pm

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