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मणप्पुरम गोल्ड के डकैत ने खोले ऐसे-ऐसे राज, सुनकर पुलिस के भी उड़ गए होश

वेस्ट बंगाल से प्रोटेक्शन वारंट में अंबिकापुर लाए गए डकैत से पुलिस ने की पूछताछ, डकैती से पहले गिरोह के 2 सदस्यों ने की थी रेकी

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अंबिकापुर. सवा साल पहले शहर के ब्रह्म रोड मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी में हुइ करोड़ों की हुई डकैती मामले में सरगुजा पुलिस ने एक आरोपी को पश्चिम बंगाल से प्रोटेक्शन वारेंट पर शुक्रवार को अंबिकापुर लेकर आई है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को कई राज बताए हंै। अब पुलिस इसके माध्यम से अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

गिरफ्तार आरोपी ने बताया कि घटना को अंजाम देने में कुल पांच आरोपी शामिल थे। घटना के पूर्व दो आरोपी ने अंबिकापुर आकर रेकी की थी। इसके बाद घटना को अंंजाम दिया गया था।


पुलिस के अनुसार करीब सवा साल पहले हथियारबंद डकैतों ने (पिस्टल/कट्टा) से लैस 5 आरोपी दिन दहाड़े शहर के ब्रम्ह रोड मणप्पुरम गोल्ड कंपनी घुस कर लगभग 12 किलो सोना व नकदी लेकर पार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी।

इनमें शामिल एक आरोपी बिहार के नवादा निवासी 48 वर्षीय नित्यानंद पांडेय उर्फ सुनील पिता चंद्रिका उर्फ सुदामा पांडेय को पश्चिम बंगाल थाना रानीगंज पुलिस ने बैंक डकैती मामले में 3 मार्च को ही आसनसोल से गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी को पकडऩे में छत्तीसगढ़ और बंगाल पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की थी।

इसके बाद आरोपी को पश्चिम बंगाल से अंबिकापुर लाने के लिए पुलिस ने न्यायालय से प्रोटेक्शन वारंट प्राप्त लिया। फिर शुक्रवार को उसे अंबिकापुर लेकर पहुंची। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि कुल पांच लोगों ने मिलकर घटना को अंजाम दिया था। 4 जनवरी 2017 को दो बाइक में सवार होकर आरोपी धनबाद से अंबिकापुर पहुंचे थे।

घटना को अंजाम देने के बाद बाइक से ही बलरामपुर-रामानुजगंज होते हुए गढ़वा पहुंचे थे। यहांं सभी ने चोरी के सोना का बंटवारा किया था। नित्यानंद ने बताया कि मेरे हिस्से में डेढ़ किलो सोना मिला था। जिसे उसने 25 लाख में बेच दिया था। नित्यानंद की निशानदेही पर पुलिस अन्य आरोपियों व खरीददार को तलाश कर रही है।


धनबाद जेल में हुई थी दोस्ती
पुलिस ने बताया कि आरोपी नित्यानंद डकैती, लूट, चोरी जैसे दस मामले में जेल जा चुका है। वह 1992 से चोरी कर रहा है। चोरी मामले में नित्यानंद धनबाद जेल में बंद था। इसी दौरान जेल में बंद दो आरोपियों से इसकी दोस्ती हुई। इसके बाद नित्यानंद जेल से छुट गया था। कुछ दिन बाद जब उसके दोनों दोस्त जेल से बाहर आए तो अंबिकापुर आकर घटना को अंजाम दिया था।


धनबाद में बनी थी वारदात की प्लानिंग
आरोपी नित्यानंद ने पुलिस को बताया कि घटना को अंजाम देने से दो दिन पूर्व दो लोग अंबिकापुर आए थे और रेकी की थी। इसके बाद दोनों धनबाद वापस चले गए थे। धनबाद में ही घटना को अंजाम देने की तैयारी की गई थी। घटना को अंजाम देने दो बाइक से धनबाद से पांच आरोपी अंबिकापुर आए थे।

इसके बाद घटना को अंजाम देने के बाद सभी बाइक से बलरामपुर-रामानुजगंज होते हुए गढ़वा गए थे। गढ़वा में एक आरोपी के रिश्तेदार के घर रूके और चोरी के सोना का बंटवारा किया था। इसके बाद सभी आरोपी अपने-अपने घर चले गए थे।


घटना दिवस को बलरामपुर पुलिस को दे दिया था चकमा
घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी बाइक से ही बलरामपुर-रामानुजगंज होते हुए गढ़वा गए थे। घटना के बाद संभाग में नाकेबंदी कर दी गई थी। इस दौरान बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस कई स्थानों पर बेरिकेड लगाकर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान आरोपी बाइक से उतरकर हाथ में थैला व बैग लेकर राहगीर के रूप में वहां से निकले थे। इस कारण पुलिस को उन पर किसी प्रकार का शक नहीं हुआ था।

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